मुजफ्फरपुर में परिवार नियोजन के कड़े टारगेट से स्वास्थ्यकर्मियों के छूटे पसीने, लाखों खर्च फिर भी चुनौती

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मुजफ्फरपुर: परिवार नियोजन लक्ष्यों से स्वास्थ्यकर्मी परेशान

मुजफ्फरपुर में परिवार नियोजन के कड़े टारगेट से स्वास्थ्यकर्मियों के छूटे पसीने, लाखों खर्च फिर भी चुनौती

मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य विभाग ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन के कड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं. पीएचसी, यूपीएचसी और एनजीओ के कर्मचारियों को इन्हें पूरा करने में पसीने छूट रहे हैं. लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद, भ्रांतियां और सीमित संसाधन मुख्य बाधाएं बनी हुई हैं.

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Family planning drive target: मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे विशेष पखवाड़े के तहत कड़े लक्ष्य सौंपे गए है. सदर अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को मिले इन लक्ष्यों को पूरा करने में कर्मियों के पसीने छूट रहे है. इस विशेष अभियान पर विभाग हर बार लाखों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर तय किए गए आंकड़े कर्मियों के लिए गले की फांस बनते नजर आ रहे है.

पीएचसी, यूपीएचसी और एनजीओ को मिले अलग-अलग लक्ष्य

विभाग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, अलग-अलग स्तर पर स्वास्थ्य इकाइयों को कड़े टारगेट दिए गए है. हर पीएचसी को न्यूनतम 10 पुरुष नसबंदी, 60 महिला बंध्याकरण, 100 कॉपर-टी लगाने तथा 200 महिलाओं को अंतरा (गर्भनिरोधक इंजेक्शन) लगाने का जिम्मा सौंपा गया है. वहीं, एनजीओ को 20 पुरुष नसबंदी, 70 महिला बंध्याकरण, 20 कॉपर-टी और 50 अंतरा का टारगेट मिला है. शहरी क्षेत्रों में कार्यरत यूपीएचसी को 10 पुरुष नसबंदी, 20 महिला बंध्याकरण, 30 कॉपर-टी और 50 अंतरा के लिए लोगों को प्रेरित करने की जिम्मेदारी दी गई है.

भ्रांतियां और सीमित संसाधन बने लक्ष्य में सबसे बड़ी बाधा

पुरुष नसबंदी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों के कारण पुरुष आगे नहीं आ रहे है, जिससे यह लक्ष्य पूरा करना सबसे टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. ग्रामीण इलाकों में सीमित संसाधनों के बीच इतने कम समय में बंध्याकरण और अंतरा के आंकड़ों को छूना एएनएम, आशा और डॉक्टरों के लिए भारी पड़ रहा है. अधिकारियों के कड़े रुख के कारण कर्मी दिन-रात फील्ड में दौड़ भाग कर रहे है. स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि सिर्फ कागजी टारगेट थमा देने से लक्ष्य हासिल नहीं होते, इसके लिए समाज में जागरूकता और पर्याप्त बुनियादी ढांचे की जरूरत है.


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कुमार दीपू

लेखक के बारे में

By कुमार दीपू

स्वास्थ्य, राजनीति, समाज और समसामयिक विषयों पर दीपू रिपोर्टिंग करते हैं. इन्हें पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव है.

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