डिजिटल अरेस्ट ठगी केस में साइबर पुलिस की गलती, बेल पर छूटे आरोपी को बताया न्यायिक हिरासत में

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सांकेतिक तस्वीर, AI Generated Image

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मुजफ्फरपुर साइबर थाना पुलिस 67 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में एक बड़ी चूक सामने आई है। चार्जशीट में जमानत पर रिहा आरोपी को न्यायिक हिरासत में दिखाया गया है, जिसने मामले को नया मोड़ दिया है। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में अर्जी दाखिल की है।

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Muzaffarpur Cyber News: 67 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में मुजफ्फरपुर साइबर थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है. पुलिस ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में जमानत पर रिहा आरोपी को भी न्यायिक हिरासत में दर्शा दिया, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

चार्जशीट में सामने आई बड़ी चूक

साइबर थाना पुलिस ने फर्जीवाड़े के आरोप में रिटायर्ड सांख्यिकी अधिकारी प्रियरंजन शर्मा और उनके पुत्र अनंत अमीष को गिरफ्तार किया था. अगले दिन प्रियरंजन शर्मा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि अनंत अमीष को अदालत से जमानत मिल गई. इसके बावजूद चार्जशीट में दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना दर्शाया गया.

अधिवक्ता ने कोर्ट में दाखिल की अर्जी

चार्जशीट में हुई इस त्रुटि के खिलाफ बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में अर्जी दाखिल की है. अर्जी में कहा गया है कि जेल केवल एक आरोपी को भेजा गया था, जबकि चार्जशीट में दोनों को न्यायिक हिरासत में दिखाया गया है. अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है.

67 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी का मामला

मामला 67 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़ा है. आमगोला निवासी पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी महेश गामी ने 9 अप्रैल को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उनसे 67 लाख रुपये की ठगी की गई.

छापेमारी में मिले बैंक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान

26 अप्रैल को पटना के राजीव नगर में छापेमारी के दौरान पुलिस ने प्रियरंजन शर्मा के पास से 2.39 लाख रुपये नकद, 19 बैंक पासबुक, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए थे. जांच में आरोप है कि पिता-पुत्र खुद को पुलिस, सीबीआई और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करते थे.


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चंदन सिंह

लेखक के बारे में

By चंदन सिंह

चंदन सिंह बीते 12 सालों से क्राइम रिपोर्टिंग की दुनिया में सक्रिय हैं. 2016 से लगातार प्रभात खबर के साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले दैनिक जागरण और भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के लिये योगदान दे चुके हैं. क्राइम रिपोर्टिंग में इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म पर अधिक फोकस. पत्रकारिता में मास्टर्स की पढ़ाई की है.

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