नए आपराधिक कानून के तहत होगी कार्रवाई, बिहार में भगोड़े अभियुक्तों के खिलाफ भी कोर्ट सुनाएगा फैसला

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नए आपराधिक कानून के तहत होगी कार्रवाई, बिहार में भगोड़े अभियुक्तों के खिलाफ भी कोर्ट सुनाएगा फैसला

बिहार में न्यायिक प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है. अब भगोड़ा घोषित हो चुके अभियुक्तों पर भी उनकी अनुपस्थिति में कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा. इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद है.

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 Bihar Court Trial: राज्य में कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. अब भगोड़ा घोषित किए जा चुके अभियुक्तों के विरुद्ध भी उनकी अनुपस्थिति में कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा. पिछले दिनों अभियोजन निदेशालय के विशेष सचिव सह प्रभारी निदेशक ने अभियोजन कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की. इस समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य में विचारण (ट्रायल) के लिए 40 हजार से अधिक कांड लंबित हैं. लंबित मामलों की इस भारी संख्या को कम करने और इनका तेजी से निष्पादन करने के लिए विशेष सचिव ने संबंधित पदाधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

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कोर्ट से लिखित रूप से किया जाएगा अनुरोध

विशेष सचिव ने पदाधिकारियों से कहा है कि जिन मामलों में अभियुक्त को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है, उनके खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के लिए कोर्ट में लिखित रूप से अनुरोध किया जाए. कोर्ट से स्वीकृति मिलते ही ऐसे वादों का चयन किया जाएगा और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किया जाएगा. नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद, जिन मामलों में 10 साल की सजा, आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है और उनमें अभियुक्त भगोड़ा घोषित हो चुका है, उन्हें इस प्रक्रिया के लिए योग्य माना गया है.

आरोप गठन के लिए उपस्थित न होने पर रद्द होगा बेल बॉन्ड

समीक्षा के दौरान पाया गया कि राज्य में विचारण के लिए लंबित 40 हजार से अधिक मामलों में से लगभग 600 मामले पुलिस पेपर की उपलब्धता और 400 से अधिक मामले आरोप गठन के स्तर पर अटके हैं. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अगली निर्धारित तिथि पर अभियुक्तों को हर हाल में पुलिस पेपर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए. यदि आरोप गठन के समय अभियुक्त जानबूझकर कोर्ट में उपस्थित नहीं होता है, तो उसका बंधपत्र (बेल बॉन्ड) खंडित (कैंसिल) करने के लिए कोर्ट में लिखित अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है.

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