बिहार के इस जिले में 45 दिनों में 15 दंपत्तियों ने लिया तलाक, सोशल मीडिया बन रहा रिश्तों में विलेन
प्रतीकात्मक फोटो
Muzaffarpur News: अध्ययन में कहा गया कि दंपत्ति अक्सर अपने साथी के फेसबुक अकाउंट पर कुछ खोजने के बाद अपने रिश्ते को लेकर असहज महसूस करते हैं. इससे अक्सर रिश्ते में निगरानी, ईर्ष्या और संघर्ष बढ़ जाता है.
Muzaffarpur News: सोशल मीडिया दांपत्य जीवन में खटास उत्पन्न कर रहा है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे साइटस की वजह से पति-पत्नी के बीच बढ़ती दूरियां तलाक का कारण बन रही है. अब स्थिति इतनी भयावह हो रही है कि छोटे शहरों में भी तलाक की संख्या बढ़ती जा रही है. पिछले 45 दिनों में मुजफ्फरपुर में 15 दंपत्तियों ने तलाक लिया हे, जिसमें एक तिहाई तलाक का कारण सोशल मीडिया का इस्तेमाल है. पति-पत्नी के बीच बढ़ता शक, ईर्ष्या और लापरवाही के कारण तलाक के मामले में तेजी आयी है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष जनवरी से अब तक तलाक के लिये 185 मामले दायर हो चुके हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार तलाक के केस में त्वरित कार्रवाई हो रही है और जज अपना फैसला सुना रहे हैं. फैमिली कोर्ट में तलाक के आवेदन के बाद सुलह के प्रयास भी बेकार साबित हो रहे हैं. जिद, अहंकार और आधुनिक जीवन शैली पारिवारिक बिखराव को रोकने में विफल साबित हो रही हैं.
छोटे शहरों में भी तलाक में तीन गुना वृद्धि
एडजुआ लीगल्स गूगल एनालिटिक रिपोर्ट के महानगरों के अलावा छोटे शहरों में तलाक के आवेदनों में तीन गुना वृद्धि देखी जा रही है. कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहैवियर में प्रकाशित एक अध्ययन में तलाक दरों की तुलना प्रति व्यक्ति फेसबुक आउंटस की गयी, जिसमें सोशल मीडिया के उपयोग को विवाह की गुणवत्ता में बड़ा कारण माना गया है. शोध मे पाया गया कि कोई व्यक्ति अपने जितना ही अपने साथी की फेसबुक गतिविधि की जांच करता है, वह उतना ही ईर्ष्या और अविश्वास से भरता जाता है.
केस से समझें सोशल मीडिया की भूमिकासोशल मीडिया किस तरह तलाक की वजह बन रहा है, इसे मुजफ्फरपुर के कुछ केस से समझा जा सकता है. एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से इसलिये तलाक लिया कि पत्नी उसकी परवाह नहीं करती थी. वह हर समय सोशल मीडिया में उलझी रहती थी. उसका अधिकतर समय मोबाइल पर ही बीतता था. पत्नी ने अपना सोशल मीडिया अकाउंटस भी गुप्त रखा था.पति को शक था कि पत्नी उसके साथ बेवफाई कर रही है और नौबत तलाक तक आ पहुंची. दूसरा केस भी ऐसा ही है. सोशल मीडिया युवक से जान पहचान होने के बाद युवती ने भाग कर शादी कर ली. युवक ने बताया था कि वह इंजीनियर है, लेकिन ऐसा नहीं था. विश्वास टूटने के बाद युवती ने शादी तोड़ ली और कोर्ट में तलाक की अर्जी दी
उम्र के हिसाब से तलाक के मामले
आयु तलाक (फीसदी)
18-24 – 27.6
25-34 – 35.1
35-44 – 16.2
45-54 – 10.0
55-64 – 07.0
65 से अधिक – 05.0
स्रोत : एडजुआ लीगल्स गूगल एनॉलिटिक, 2025
इसे भी पढ़ें: Bihar Weather: बिहार के लोग रहे सावधान, 26 जिलों में 21 और 22 मार्च को होगी बारिश, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट
वकील का क्या कहना है
तलाक के बढ़ रहे मामले पर तलाक वरिष्ठ वकीलडॉ संगीता शाही ने कहा कि इन दिनों ऐसे मामले काफी बढ़े हैं. फैमिली कोर्ट में केस दर्ज होने के बाद पति-पत्नी की काउंसलिंग की जाती है कि वह एक साथ रहने के लिए राजी हो जाये, लेकिन अधिकतर मामलों में दोनों अपनी जिद पर अड़े रहते हैं. दोनों पक्षों के तैयार नहीं होने पर तलाक का फैसला दिया जाता है. तलाक के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं.
इसे भी पढ़ें: Patna News: पटना में 1 करोड़ की लूट, नवादा की ओर भागे अपराधी, जमीन रजिस्ट्री कराने आये थे लोग
रिटायर्ड जज ने क्या कहा
रिटायर्ड जज आरपी ठाकुर ने कहा कि बदलते समय में सोशल मीडिया दांपत्य जीवन में आपसी मनमुटाव का एक बड़ा कारण बन गया है. मनमुटाव से शुरू हुआ वैचारिक मतभेद तलाक तक पहुंच रहा है. दरअसल सोशल मीडिया हमें आभासी दुनिया का सैर कराता है, जिससे हम अपने व्यवहारिक जीवन से कट जाते हैं. इससे एक दूसरे के प्रति शक, ईर्ष्या, कटुता जैसी भावना उत्पन्न होती है. यह तलाक का बड़ा कारण है. मानसिक प्रदूषण को रोक कर ही हम परिवार को बिखरने से बचा सकते हैं.
पढ़िए प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी: पाकिस्तान में ट्रेन हाईजैक करने वाली बलूच लिबरेशन आर्मी की मांग क्या है, वे क्यों 1948 से ही कर रहे विद्रोह?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










