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चमकी बुखार को लेकर केंद्र गंभीर

Updated at : 14 Jun 2019 5:50 AM (IST)
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चमकी बुखार को लेकर केंद्र गंभीर

नयी दिल्ली : बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब तक दर्जनों बच्चे की मौत हो चुकी है.मुजफ्फरपुर और इसके आस-पास के इलाकों में भयंकर गर्मी और उमस की वजह से बच्चे एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार के कारण मौत के शिकार हो […]

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नयी दिल्ली : बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब तक दर्जनों बच्चे की मौत हो चुकी है.मुजफ्फरपुर और इसके आस-पास के इलाकों में भयंकर गर्मी और उमस की वजह से बच्चे एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार के कारण मौत के शिकार हो रहे हैं. इसके रोकथाम को लेकर केंद्र गंभीर है. सिरदर्द और तेज बुखार के लक्षणों वाली इस बीमारी से निबटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय बिहार को हरसंभव मदद मुहैया कराने का वादा किया है.
गुरुवार को इस मसले पर एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सुदान, संयुक्त सचिव लव अग्रवाल शामिल हुए. इसमें मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के हालात का जायजा लेने गयी केंद्रीय टीम को लेकर भी चर्चा हुई.
मंगल पांडे ने हालात से निबटने के लिए बिहार सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की भी जानकारी दी. बैठक में तय किया गया कि इससे निबटने के तरीकों में तेजी लाने के अलावा लोगों को जागरुक करने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की समुचित व्यवस्था, आशा कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर लोगों को बीमारी के कारण बताये जाने पर जोर दिया जाये.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिले मंगल पांडे
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि चमकी बुखार को पहले प्रयास कर नियंत्रित किया गया था. वर्ष 2014 में भी ऐसी समस्या सामने आयी थी, लेकिन इस पर काबू पाने में मदद मिली थी.
रोग को रोकने के लिए अनुसंधान चल रहा है. राज्य को केंद्र हरसंभव मदद देगा. इस मामले में बिहार सरकार भी सतर्क है. एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम वहां मौजूद है और टीम की रिपोर्ट आने के बाद इस पर गंभीरता से विचार किया जायेगा. शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भी मुजफ्फरपुर का दौरा कर हालात का जायजा लेंगे. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी शुक्रवार को श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मुजफ्फरपुर पहुुंच कर वहां इलाजरत इंसेफ्लाइटिस पीड़ित बच्चों का हाल जानेंगे.
पटना : जेइ के सात मामलों में नहीं हुई कोई भी मौत
पटना : मुजफ्फरपुर में बीमार बच्चों में अब तक कुल 47 की मौत हो चुकी है. इसमें जनवरी से अब तक 179 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया. जांच के दौरान बीमार पड़ने वाले सात बच्चों में जेपनिज इंसेफ्लाइटिस (जेइ) के वायरस पाये गये. इन सात बच्चों में किसी की भी मौत नहीं हुई है.
सभी बच्चे स्वस्थ होकर लौट गये हैं. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार जिन 179 बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, उनमें ग्लूकोज की कमी से पीड़ित 165 बच्चे थे. ग्लूकोज की कमी के कारण 46 बच्चों की मौत हुई है.
इसके अलावा दो बच्चों में इलकेक्ट्रोलाइट्स की कमी पायी गयी, जिसमें से एक की मौत हो गयी है. चिकेनपॉक्स से पीड़ित एक बच्चे, जेइ से पीड़ित सात बच्चे और अज्ञात बीमारी से चार बच्चों को भर्ती कराया गया, जिसमें किसी की भी मौत नहीं हुई है. अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर जागरूक किया जा रहा है.
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