मोबाइल से दूर रहा तभी बना टॉपर

Published at :17 Jun 2017 10:18 AM (IST)
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मोबाइल से दूर रहा तभी बना टॉपर

मुजफ्फरपुर/पटना: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) और जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) की प्रवेश परीक्षा में पटना के राजेंद्रपथ निवासी निपुण चंद्रा ने परचम लहराया है. एम्स प्रवेश परीक्षा में निपुण चंद्रा ने चौथा और जिपमर में पहला स्थान हासिल कर बिहार को गौरवान्वित किया है. इस […]

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मुजफ्फरपुर/पटना: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) और जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) की प्रवेश परीक्षा में पटना के राजेंद्रपथ निवासी निपुण चंद्रा ने परचम लहराया है. एम्स प्रवेश परीक्षा में निपुण चंद्रा ने चौथा और जिपमर में पहला स्थान हासिल कर बिहार को गौरवान्वित किया है. इस सफलता के लिए निपुण ने अपने माता-पिता के साथ-साथ शिक्षक और अपने कठिन परिश्रम व लगन को श्रेय दिया है. उन्होंने प्रथम प्रयास में ही यह सफलता अर्जित की है.

निपुण 10वीं और 12वीं की पढ़ाई डीएवी, भुवनेश्वर से की है. उन्होंने इसी वर्ष 94.8% अंकों के साथ 12वीं पास की है. इनके पिता नितिन चंद्रा ओड़िश कैडर के आइएएस अधिकारी हैं. वह फिलहाल भुवनेश्वर में सोशल सिक्योरिटी एंड इंपेयरमेंट्स ऑफ पर्संस ऑफ डिसएबिलिटी डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव हैं, वहीं मां शालिनी चंद्रा एडवोकेट हैं. निपुण ने कहा कि आठवीं क्लास से ही मेडिकल की तैयारी की इच्छा मन में थी. 10वीं के बाद से मैंने इनकी तैयारी शुरू कर दी. मेरे फैसले को माता-पिता ने काफी सपोर्ट किया, जिससे आत्मविश्वास काफी बढ़ा.

अब तक साथ नहीं रखा मोबाइल
मोबाइल से अब तक दूरी बनाये रखने वाले निपुण ने कहा कि पिता जी चाहते हैं कि मैं एक सफल डॉक्टर बनूं. इसके लिए मैं भी प्रयासरत रहा. मेरी इच्छा शुरू से ही एम्स, दिल्ली में पढ़ने की थी और एम्स रिजल्ट आने के बाद यह इच्छा पूरी हो गयी. मैंने बोर्ड को भी उतना ही महत्व दिया, जितना मेडिकल की तैयारी को. बस बोर्ड को ध्यान में रख कर मेडिकल की तैयारी भी जारी रही. बोर्ड में बेसिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि मेडिकल में इसका लेवल हाइ रहता है. मैंने हमेशा घर पर सात से आठ घंटे की पढ़ाई की.
इसके बाद स्कूल और कोचिंग में पढ़ाई की. मैं हमेशा अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी, इसलिए अब तक मोबाइल से दूर हूं. सोशल नेटवर्किंग पर कोई भी एकाउंट भी नहीं है. पढ़ाई के दौरान कभी मोबाइल की जरूरत भी नहीं पड़ी.
मां ने वकालत की प्रैक्टिस कम कर दी
बेटे की सफलता पर शालिनी चंद्रा काफी खुश हैं. वह बेटे को सफलता दिलाने के लिए उनके साथ हमेशा खड़ी रहीं. इस दौरान शालिनी चंद्रा ने अपनी वकालत की प्रैक्टिस कम कर दी और बेटे के सपने को सकार करने में जुट गयीं. पढ़ाई के समय बेटे का खान-पान पर ध्यान दिया. वहीं, निपुण ने कहा कि मां ने समय दिया और पिता ने आत्मविश्वास बढ़ाया और समय-समय पर सही मार्गदर्शन किया.
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