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Muzaffarpur: आत्मनिर्भरता की मिसाल, मछली उत्पादन में बना सिरमौर बना मुजफ्फरपुर

Updated at : 30 Jun 2025 8:37 PM (IST)
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Muzaffarpur

Muzaffarpur News: पिछले चार वर्षों में मुजफ्फरपुर मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है. यहां अब 44.10 हजार मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन हो रहा है. सरकारी योजनाओं, युवाओं और जीविका दीदियों की भागीदारी से जिले में मछली पालन बढ़ा है और यह उत्तर बिहार का प्रमुख केंद्र बन गया है.

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Muzaffarpur news: पिछले चार वर्षों से मुजफ्फरपुर में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है. यह अब न केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ है, बल्कि दूसरे जिले में भी मछली सप्लाई कर रहा है. पहले यहां का मछली कारोबार आंध्रपदेश पर केंद्रित था, लेकिन विगत वर्षों में यह परिदृश्य बदल चुका है. हर साल मछली उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. यह सरकारी योजनाओं, युवा उद्यमियों की बढ़ती रुचि और जीविका दीदियों के सशक्तिकरण का ही परिणाम है. 

मुजफ्फरपुर बना मछली उत्तपादन का केंद्र

यह बदलाव जिले को उत्तर बिहार में मछली उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है. मत्स्य विभाग के आंकड़ों को देखें तो तीन वर्षों में आठ हजार मीट्रिक टन उत्पादन बढ़ा है. वर्ष 2021 में 36.10, 2022 में 39.30, 2023 में 43.40 और 2024 में 44.10 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ है. जबकि खपत 40.22 हजार मीट्रिक टन है. अब यहां की मछली का कारोबार दूसरे जिलों में किया जा रहा है. 

बड़ी संख्या में लोग कर रहे हैं मछली पालन 

जिले में अब जरूरत से ज्यादा मछली का उत्पादन किया जा रहा है. मछली उत्पादन में अब बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है. जिले में तालाबों की संख्या भी 3152 से बढ़कर पिछले साल 3600 और इस साल अब तक 3650 हो गयी है. मत्स्य विभाग लोगों को प्रशिक्षित कर कम जगह में भी मछली पालन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. सरकारी सहायता और अनुदान से इस क्षेत्र में नए निवेशक आकर्षित हो रहे हैं.

जिले में करीब 4000 लोग कर रहें मछली पालन

मत्स्य विभाग के अनुसार, जिले में पिछले साल तक 3700 लोग मछली पालन कर रहे थे, जो बढ़कर चार हजार हो गये हैं. इनमें से 2200 निजी तालाब और 1552 सरकारी तालाब हैं. प्रखंड स्तर पर भी लोग मछली पालन को लेकर सक्रिय हैं. मत्स्य विभाग न केवल प्रशिक्षण दे रहा है, बल्कि तालाबों के निर्माण में भी लोगों की मदद कर रहा है. 

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जीविका दीदियों की भागीदारी बढ़ी

मछली पालन में जीविका दीदियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन के लिए 60 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं.

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Nishant Kumar

लेखक के बारे में

By Nishant Kumar

Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.

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