ePaper

11वां विश्व योग दिवस सत्संबंध योग के विकास को समर्पित : स्वामी निरंजनानंद

Updated at : 20 Jun 2025 8:43 PM (IST)
विज्ञापन
11वां विश्व योग दिवस सत्संबंध योग के विकास को समर्पित : स्वामी निरंजनानंद

बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि बिहार योग विद्यालय वर्ष 2025 को सत्संबंध योग के विकास को समर्पित करता है.

विज्ञापन

मुंगेर. बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि बिहार योग विद्यालय वर्ष 2025 को सत्संबंध योग के विकास को समर्पित करता है. एकादश अंतराष्ट्रीय योग दिवस आगामी वर्षों में सत्संबंधों के विकास और वृद्धि पर जोर देता रहेगा. वह चाहे हमारी बुद्धि, भावना और कर्म में सामंजस्यपूर्ण संबंध हो या परिवार के सदस्यों का आपसी संबंध, विद्यालय, कार्यालय और समाज में सद्भावना का संबंध अथवा प्रकृति और धरती मां के साथ सम्मान व देखभाल का संबंध हो. उन्होंने कहा कि 11वां विश्व योग दिवस के अवसर पर बिहार योग विद्यालय की वार्षिक साधना योग साधकों को अपने शरीर, मन, भावनाओं, सामाजिक, प्राकृतिक वातावरण तथा अपने भीतर की सकारात्मकता से संबंध जोड़ने के लिए प्रेरित करती है. संतुलित मन उस सकारात्मकता को सद्भावनापूर्ण संबंधों एवं व्यवहारों द्वारा अभिव्यक्त करता है. जिनका आधार धर्म होता है. स्वामी निरंजनानंद ने कहा कि आसन, प्राणायाम, विश्रान्ति और ध्यान के अभ्यास सत्संबंध के पहले स्तर को स्थापित करते है. जहां हम स्वस्थ्य, संतुलित शरीर एवं मन प्राप्त करते हैं. इसके साथ-साथ एक सुव्यवस्थित, यौगिक जीवनशैली हमें एक संयमित दिनचार्य से जोड़कर हमारे स्वास्थ्य को संवर्धित करती है. उन्होंने कहा कि समत्वम् का तात्पर्य सभी परिस्थितियों में संतुलित रहने से है. भगवतगीता में श्रीकृष्ण कहते हैं- समत्वं योग उच्यते अर्थात मन की समता ही योग है. आप अपनी वृत्तियों से, अपने राग-द्वेष से प्रभावित नहीं होते, बल्कि संतुलित और संतुष्ट रहते हैं. आप बाह्य परिस्थितियों का अनुभव वश्य करते हैं, लेकिन वे आपकी आंतरिक समात को डगमगा नहीं पाती. मन और हृदय की यह समता फिर सबके प्रति उदारतापूर्वक अभिव्यक्त होती है. उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ है सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कर्म. जब मनुष्य के विचार व्यवहार और कर्म अच्छाई से युक्त होते हैं तो वे निजी स्तर पर शांति और स्वतंत्रता तथा सामाजिक स्तर पर सामंजस्य और सद्भावना का मार्ग प्रशस्त करते है. समत्वम् के यम और धर्म के नियम को आत्मसात् करके आप जीवन की परिस्थितियों का कुशलता एवं शांति के साथ सामना कर सकेंगे. उनहोंने कहा कि योग एक जीवंत अनुभव बन जायेगा, जो आपके बाहरी वातावरण में भी सत्मसंबंध लायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
BIRENDRA KUMAR SING

लेखक के बारे में

By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन