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एक्स-रे टेक्नीशियन के भरोसे अल्ट्रासाउंड, चार साल पहले ही चिकित्सक दे चुका इस्तीफा

Updated at : 27 Aug 2025 12:35 AM (IST)
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एक्स-रे टेक्नीशियन के भरोसे अल्ट्रासाउंड, चार साल पहले ही चिकित्सक दे चुका इस्तीफा

एक्स-रे टेक्नीशियन के भरोसे अल्ट्रासाउंड, चार साल पहले ही चिकित्सक दे चुका इस्तीफा

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मुंगेर. सदर अस्पताल मुंगेर में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली अब जग-जाहिर हो चुकी है. आलम यह है कि वर्षाें से यहां एक्स-रे टेक्नीशियन अल्ट्रासाउंड जांच कर रहा है. जिम्मेदार मूकदर्शक बना हुआ है. जिस चिकित्सक के नाम पर सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र निबंधित है. वह चार साल पहले ही इस्तीफा दे चुका है. ऐसे में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का दावा मुंगेर में केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

इस्तीफा दे चुके चिकित्सक के नाम अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र

पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थान में संचालित अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र का निबंधन आवश्यक है. साथ ही निर्धारित मानक के अनुरूप जिस चिकित्सक के नाम पर अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र निबंधित है. उस चिकित्सक द्वारा ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड जांच करना है. चार साल पहले सदर अस्पताल में संचालित अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र का निबंधन डॉ गोविंद कुमार के नाम पर किया गया था, लेकिन आश्चर्य यह है कि जिस चिकित्सक डॉ गोविंद कुमार के नाम पर अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र निबंधित है. वह साल 2021 में ही इस्तीफा दे चुका है और आज भी उनके नाम पर यहां अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र संचालित हो रहा है.

एक्स-रे टेक्नीशियन कर रहा मरीजों व गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड

सदर अस्पताल एवं स्वास्थ्य विभाग के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में किस प्रकार पीसीपीएनडीटी एक्ट की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर जहां चार साल पहले इस्तीफा दे चुके चिकित्सक के नाम पर अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र निबंधित है. वहीं मरीजों और गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड जांच एक्स-रे टेक्नीशियन द्वारा किया जा रहा है. यदि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के आंकड़ों को देखें तो औसतन प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों और गर्भवती महिलाओ का अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है. जबकि जांच केंद्र सुबह नो बजे से दोपहर बाद दो बजे तक संचालित होता है. ऐसे में औसतन चार मिनट में एक मरीज का अल्ट्रासाउंड सदर अस्पताल में किया जा रहा है, जिससे जांच की गुणवत्ता को समझा जा सकता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ रामप्रवेश प्रसाद ने बताया कि डॉ अर्चना का अल्ट्रासाउंड जांच के लिये निर्देशित किया गया है. जिसके नाम पर अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र को निबंधित किये जाने का निर्देश दिया गया है.

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कई निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों पर हो चुकी है कार्रवाई

मुंगेर. मुंगेर स्वास्थ्य विभाग जिले में बिना मानक के संचालित अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों पर भले ही कार्रवाई करता है, लेकिन खुद के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बिना मानक के संचालित अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के प्रति पूरी तरह लापरवाह बना है. बता दें कि साल 2023 में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ पीएम सहाय के कार्यकाल के दौरान जिले में लगातार निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के विरूद्ध कार्रवाई की गयी थी. जिसमें हवेली खड़गपुर और बरियारपुर सहित कई प्रखंडों में संचालित निजी अल्ट्रासाउंड की जांच कर बिना मानक के संचालित जांच केंद्रों को सील भी किया गया था, लेकिन इस दौरान सदर अस्पताल सहित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बिना मानक के संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच तक नहीं की गयी थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RANA GAURI SHAN

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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