मुंगेर में 26 करोड़ की मंदिर सौंदर्यीकरण योजना में धांधली का आरोप: बनने से पहले ही धंसने लगी उच्चईश्वर नाथ महादेव मंदिर की चहारदीवारी

Author Amit jha|Edited by Divyanshu Prashant
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पहली बारिश में धंसा चहारदीवारी का नींव | Prabhat Khabar Network

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Uchwaishwar Nath Temple: मुंगेर में 26.75 करोड़ रुपये की देवघर उच्चईश्वर नाथ महादेव मंदिर सौंदर्यीकरण योजना में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगा है. पहली ही बरसात में धंसने लगी मंदिर की चारदीवारी, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है.

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Uchwaishwar Nath Temple: बिहार सरकार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शिलान्यास की गई लगभग 26 करोड़ 75 लाख रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की देखरेख में हो रहे इस कार्य में तय मानकों को ताक पर रख दिया गया है, जिसके विरोध में अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) को लिखित आवेदन देकर उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है.

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पहली ही बरसात में खुली पोल, धंसने लगी दीवार की नींव

स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर विरोध जताते हुए बताया कि देवघर उच्चईश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर को पर्यटन और सुरक्षा के लिहाज से विकसित करने के लिए ₹26.75 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है. इस योजना के तहत वर्तमान में वन विभाग द्वारा परिसर की घेराबंदी के लिए चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण कराया जा रहा है.

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है और पहली ही मानसूनी बारिश ने इसकी पोल खोल दी. दीवार की नींव और निचला हिस्सा कई स्थानों पर धंस गया है, जिससे पूरी दीवार के कभी भी जमींदोज होने का खतरा मंडराने लगा है.

मानक ताक पर: मात्र एक फीट गहरे पिलर और तीन नंबर ईंट का खेल

ग्रामीणों ने संवेदक (ठेकेदार) और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए निर्माण की तकनीकी खामियों को उजागर किया है. उनका आरोप है कि:

  • कमजोर पिलर: इतनी ऊंची और लंबी चारदीवारी के पिलर मात्र एक फीट की गहराई पर खड़े किए जा रहे हैं, जबकि सुरक्षा मानकों के अनुसार पिलरों की गहराई काफी अधिक होनी चाहिए थी.
  • घटिया सामग्री: निर्माण कार्य में अत्यधिक बालू और अत्यंत निम्न स्तर (पीला व तीन नंबर) की ईंटों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों के बजट के बाद भी गुणवत्ता से ऐसा खिलवाड़ होगा, तो यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व की लूट है.

जिलाधिकारी से गुहार, तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग

मामले के तूल पकड़ने के बाद क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षर युक्त एक लिखित शिकायत पत्र मुंगेर के जिला पदाधिकारी (डीएम) को सौंपा है. ग्रामीणों ने मांग की है कि:

  1. निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाकर किसी स्वतंत्र तकनीकी टीम से इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.
  2. प्राक्कलक (इस्टीमेट) के विपरीत कार्य कराने वाली दोषी निर्माण एजेंसी और संबंधित लापरवाह कनीय अभियंताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो.
  3. धंस चुकी दीवार को तोड़कर दोबारा सरकारी मानकों के अनुरूप मजबूत पिलर के साथ बनवाया जाए.

Uchwaishwar Nath Temple: विभाग और निर्माण एजेंसी ने साधी चुप्पी

करोड़ों रुपये की योजना में इतने गंभीर आरोप लगने और दीवार धंसने के बावजूद वन विभाग अथवा संबंधित निर्माण एजेंसी के किसी भी अधिकारी ने अब तक सामने आकर कोई आधिकारिक बयान या सफाई नहीं दी है. अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी ग्रामीणों के आरोपों को और बल दे रही है. बहरहाल, ग्रामीणों को अब जिला प्रशासन की निष्पक्ष कार्रवाई का इंतजार है ताकि बाबा भोलेनाथ के इस पवित्र दरबार का निर्माण पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके.

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