मुंगेर में गंभीर बिजली संकट, बाजार हो रहा प्रभावित, व्यापारियों को लाखों का नुकसान

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Jul 2024 11:11 PM

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व्यापारियों को लाखों का नुकसान

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प्रतिनिधि, मुंगेर. बिजली की अघोषित कटौती के कारण पिछले चार दिनों से शहर से लेकर गांव तक त्राहिमाम है. लोगों का उमस भरी गर्मी में न सिर्फ रहना मुश्किल हो गया है, बल्कि उद्योग-धंधे भी प्रभावित हो रहे हैं. प्रतिदिन व्यापारियों को 10 लाख से अधिक का नुकसान हो रहा है. दिन में बिजली कटने से एक ओर जहां शहर में जेनरेटर विहीन दुकान व प्रतिष्ठान का शटर गिर रहा है. वहीं दूसरी ओर दिन में बिजली कटने से जेनरेटर चलाकर काम चलाना पड़ता है. इससे व्यवसायियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है. बिजली संकट से बाजार हो रहा प्रभावित. मुंगेर शहर में 3000 हजार से अधिक दुकान व प्रतिष्ठान है, जबकि छोटे-छोटे कई औद्योगिक इकाई व सेवा इकाई है. लेकिन बिजली पर्याप्त न मिलने से कारोबार पर असर पड़ा है. बिजली नहीं रहने के कारण बड़े व्यवसायी डीजी सेट व जेनरेटर का इस्तेमाल कर रहे है. जिससे उनका डीजल खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है. आटा मिल, मसाला मिल, आरओ प्लांट, होटल, रेस्टोरेंट, आइसक्रीम पार्लर, ठंडा विक्रेता एवं शो-रूम संचालकों व दुकानदारों की चिंता बढ़ गयी है. इन पर दो तरह का खर्च पड़ रहा है. एक तरफ बिजली का बिल देना हैं, तो दूसरी तरफ डीजल पर खर्च हो रहा है. ऐसे में होने वाली बचत कुल मिलाकर बराबर हो जा रही है. बिजली नहीं रहने से इन्वर्टर चार्ज नहीं हो पा रहे हैं. बड़े-बड़े शोरूम और लग्जरी रेस्टोरेंट व आवासीय होटल में बिजली नहीं रहने के कारण काफी परेशान है. एसी व कूलर फेल, न दिन में राहत न रात में चैन. बिजली कटौती के कारण आमलोग काफी परेशान है. न दिन में राहत है और न रात में चैन है. एसी व कूलर फेल हो गया है. क्योंकि इसे इन्वर्टर पर चलाना मुश्किल है. पंखा भी कुछ घंटों में ही दम तोड़ दे रही है. क्योंकि 24 घंटे में 16 से 18 घंटे ही बिजली लोगों को मुहैया हो पा रही है. इस कारण इन्वर्टर भी चार्ज नहीं हो पा रहा है. सबसे अधिक परेशानी पानी का हो रहा है. क्योंकि बिजली नहीं रहने के कारण मोटर नहीं चल पा रहा है. मुंगेर सदर क्षेत्र में 34 की जगह मात्र 25 मेगावॉट मिल रही बिजली. बिजली विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सफियाबाद ग्रिड से मुंगेर सदर क्षेत्र के अलावे जमालपुर व बरियारपुर में बिजली सप्लाई होती है. इसके लिए 100 मेगावॉट बिजली का डिमांड है, लेकिन पिछले तीन दिनों से 70 से 80 मेगावॉट ही बिजली मिल पा रही है. इसमें जमालपुर रेल कारखाना, आईटीसी कंपनी, आईटीसी डेयरी प्लांट भी शामिल है. कम बिजली मिलने के बाद भी इन तीनों प्रतिष्ठान के बिजली में कोई कटौती नहीं होनी है. इस कारण बाजार और आम उपभोक्ताओं की बिजली में कटौती कर रोटेशन के आधार पर बिजली दी जा रही है. बताया गया कि मुंगेर निगम क्षेत्र और सदर मुंगेर और जमालपुर के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में 34 मेगावॉट बिजली का डिमांड है, लेकिन तीन दिनों से 25 से 26 मेगावॉट ही बिजली मिल रही है. इस कारण बाजार और ग्रामीण क्षेत्र में एक-एक, दो-दो घंटे फीडर स्तर पर रोटेशन के आधार पर बिजली दी जा रही है. विभाग की माने तो एनटीपीसी बाढ़ के जिस युनिट से मुंगेर को बिजली आपूर्ति की जा रही है. उसमें तकनीकी खराबी आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है. जिसके ठीक होने में अभी दो-तीन दिनों का समय लगेगा. यानी मुंगेर की जनता को अभी दो-तीन दिन और बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ सकता है. कहते हैं व्यवसायी. अरविंद शोरूम के प्रोपराइटर देव प्रकाश ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से बिजली की हालात काफी खराब है. जेनरेटर की सुविधा उनके पास नहीं है. इन्वर्टर दम तोड़ दे रहा है. इस कारण रविवार को दिन में ही दुकान का शटर गिराना पड़ा. क्योंकि बिजली नहीं रहने के कारण गर्मी के कारण उपभोक्ता खरीदारी के लिए दुकान नहीं पहुंच रहे है. फूड वास्केट रेस्टोरेंट के प्रोपराइटर दीपक कुमार ने बताया कि बिजली नहीं रहने के कारण दुकानदारी बुरी तरह प्रभावित हो रही है. छोटा जेनरेटर के सहारे किसी तरह दुकानदारी चल रही है. जेनरेटर के बल पर एसी नहीं चलता है. पंखा के भरोसे दुकान चलता है. इस कारण उपभोक्ता आने से कतराते है. जबकि हजारों का सामान बर्बाद हो रहा है. क्योंकि डीप फ्रिजर काम करना बंद कर देता है. जेनरेटर पर खर्च भी अधिक आ रहा है. श्रीवस्त्रालय के प्रोपराइटर संजय चमाड़िया ने बताया कि दिन में दुकानदारी प्रभावित हो रही है. शाम में उपभोक्ता आते तो इन्वर्टर पर काम करते हैं, लेकिन वह भी दम तोड़ देता है. एसी तो नहीं ही चलता है, पंखा चलना भी मुश्किल होता है. इस कारण उपभोक्ता ठहरते नहीं है. शाम में ही दुकान का शटर गिराना पड़ता है. मोंटे कार्लो, मान्वयर, लिवाइस के प्रोपराइटर पंकज कुमार ने बताया कि बिजली की बुरी स्थिति है. इस कारण डीजी सेट के सहारे शोरूम का संचालन करना पड़ रहा है. डीजी सेट में जलने वाली डीजल पर प्रतिदिन दो से तीन हजार रुपये खर्च करना पड़ता है. बिजली की यहीं स्थिति रही तो व्यापारियों को काफी नुकसान होगा. कहते हैं कार्यपालक अभियंता बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने बताया कि मुंगेर को 100 मेगावॉट बिजली की जरूरत है, लेकिन दो दिनों से 70 से 80 मेगावॉट बिजली ही मिल रही है. इस कारण रोटेशन के आधार पर बिजली की आपूर्ति करनी पड़ती है. उन्होंने बताया कि एनटीपीसी बाढ़ के उस यूनिट में खराबी आयी है जिससे मुंगेर को बिजली मिलती है. संभावना है कि एक-दो दिनों में तकनीकी खराबी दूर हो जायेगी और बिजली डिमांड के अनुसार मुंगेर को मिलने लगेगी.

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