डिजिटल साक्ष्य को प्रभावी बनाने के लिए दिया जाएगा कंप्यूटर प्रशिक्षण : एडीजी

192 करोड़ से होगी राज्य के सभी थानों के लिए लैपटॉप व मोबाइल की खरीद.
मुंगेर. अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ ने कहा कि नया कानून लागू होने बाद डिजिटल साक्ष्य को मान्यता मिल गयी है. इसलिए डिजिटल साक्ष्य को प्रभावी बनाने के लिए एक ओर जहां थानों को नया लैपटॉप व मोबाइल दिया जायेगा, वहीं थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. ताकि, डिजिटल साक्ष्य को कोर्ट में प्रस्तुत कर दोषियों को सजा दिलायी जा सके. ये बातें उन्होंने शुक्रवार को मुंगेर डीआइजी कार्यालय के सभागार में पुलिसकर्मियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहीं. मौके पर डीआइजी राकेश कुमार, एसपी सैयद इमरान मसूद मुख्य रूप से मौजूद थे. एडीजी (सीआइडी ) ने कहा कि 01 जुलाई 2024 को नया कानून लागू किया गया. इसमें सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में धीरे-धीरे डिजिटल चीजों को बदल दिया गया है. बदलाव के लिए पांच वर्ष की समय सीमा दी गयी है. आनेवाले दिनों में कार्रवाई थोड़ी सी फिजिकल के बदले डिजिटल के रूप में चेंज होगी. उसमें फाेरेसिंक का मामला हो अथवा जांच का मामला. बिहार में एनरॉयड मोबाइल एवं लैपटॉप खरीदने की योजना को स्वीकृति प्रदान की गयी है. 192 करोड़ की लागत से इनकी खरीद होगी. आवंटन मिल चुका है. उन्होंने कहा कि सभी थानों में प्रतिदिन एक घंटे का कंप्यूटर प्रशिक्षण वहां तैनात पुलिस पदाधिकारियों व पुलिसकर्मियों को दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि अब तक की जो व्यवस्था है, उसमें व्यक्ति बयान को बदलता रहता है. चाहे कारण जो भी हो, लेकिन डिजिटलाइजेशन के बाद आप एक बार बयान देंगे, तो वह रिकाॅर्ड हो जाएगा. उसे कोई भी नहीं बदल सकता है. उसमें छेड़छाड़ की संभावना नहीं होगी, क्योंकि यह केंद्र सरकार की एजेंसी के कंट्रोल में रहेगी. उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्य को प्रमाणित करने के लिए अलग से गवाही की जरूरत नहीं होगी. एक साल में इसका तीन गुणा असर दिखने लगेगा. यह टेक्नोलॉजी आने से ऐसा नहीं है कि बाकी गवाही बंद हो जायेगी. बाकी गवाही भी होगी, लेकिन उसकी आवश्यकता नहीं रहेगी. अगर हुई तो वह काफी कम होगी. भविष्य में थोड़ा अभियोजन को इंप्रूव करने की जरूरत है.
लंबित कांडों के निष्पादन में तेजी लाने का दिया निर्देश :
डीजीपी विनय कुमार ने नयी पहल करते हुए पुलिस के वरीय अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी बनाया गया है, जो हर माह जिले का दौरा करेंगे और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर उसकी रिपोर्ट डीजीपी को सौंपेंगे. अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पारसनाथ को मुंगेर जिले का प्रभारी बनाया है. उन्होंने शुक्रवार को डीआइजी कार्यालय के सभागार में पुलिस पदाधिकारियों व थानाध्यक्षों के साथ समीक्षा के लिए तय 19 बिंदुओं पर समीक्षा की. इसमें लंबित कांडों का निष्पादन, स्पीडी ट्रायल, कांडों के अनुसंधान में निर्देशों का अनुपालन, थानों का निरीक्षण, जनता दरबार आदि बिंदु शामिल थे. एडीजी ने एसपी कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों को लेकर कई प्रश्न भी पूछे और अब तब की कार्रवाई के बारे में जानकारी ली. उन्होंने लंबित कांडों की समीक्षा के दौरान कांडों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया. पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि भविष्य में कार्रवाई थोड़ी सी फिजिकल के बदले डिजिटल के रूप में चेंज होगी, इसको लेकर सभी तैयार रहें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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