बच्चों के अधिकारों की रक्षा व शोषण रोकने को बना है किशोर न्याय अधिनियम

Updated at : 22 Feb 2025 6:36 PM (IST)
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बच्चों के अधिकारों की रक्षा व शोषण रोकने को बना है किशोर न्याय अधिनियम

बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के वर्णित प्रावधानों को लेकर शनिवार को जागरूकता सह संवेदन ग्राह्यता कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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एक दिवसीय जागरूकता सह संवेदन ग्राह्यता कार्यशाला का आयोजन

मुंगेर. समाज कल्याण विभाग की ओर से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण), अधिनियम 2015 व संशोधित 2021 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के वर्णित प्रावधानों को लेकर शनिवार को जागरूकता सह संवेदन ग्राह्यता कार्यशाला का आयोजन किया गया. संग्राहालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव दिनेश कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक अनिमेष कुमार चंद्र, राज्य यूनिसेफ परामर्शी शाहिद जावेद व सैफूर रहमान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

जिला बाल संरक्षण इकाई मुंगेर के सहायक निदेशक ने कार्यशाला में मौजूद जिले के सभी थानाध्यक्ष एवं बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी को बाल संरक्षण से संबंधित सभी स्टेक-होल्डर्स के संबंध में जानकारी दी. साथ ही उनके कर्तव्यों के संबंध में उन्मुखीकरण किया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम में वर्णित प्रावधानानुसार पुलिस थाने में बालकों के लिए ऐसे अनुकूल स्थान पर पूछताछ करें, जहां बालक अपने आप को सहज महसूस कर सके. राज्य यूनिसेफ परामर्शी ने किशोर न्याय अधिनियम में वर्णित प्रावधानों का विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 भारत में बच्चों के साथ कानून के उल्लंघन, देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित मामलों को देखता है. यह अधिनियम बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के शोषण को रोकने के लिए बनाया गया है. किशोर न्याय परिषद में बालकों के उपस्थापन के समय सामाजिक पृष्ठभूमि प्रतिवेदन के साथ प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें. ताकि उनके वादों का निष्पादन समय से किया जा सके. उन्होंने कहा कि विशेष तौर पर लैंगिक शोषण से पीड़ित/पीड़िताओं के मामले के बालक/बालिकाओं को जिले के बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रपत्र-ख 24 घंटे के अंदर रिर्पोट करें. विधि-सह-परिवीक्षा अधिकारी, राजेश कुमार ने बताया गया कि विधि के उल्लंघन करने वाले एवं देखरेख व सरंक्षण वाले बच्चों के साथ मैत्रिपूर्ण व्यवहार करें. ताकि विधि संघर्षरत करने वाले बालकों को अपराधी बनने से रोका जा सके. बाल संरक्षण पदाधिकारी सुजीत कुमार, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ रमण, विधि-सह-परिवीक्षा अधिकारी नेहा सिंह सहित अन्य ने भी किशोर न्याय अधिनियम को लेकर जानकारी साझा की.

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