देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार मुंगेर का चंडिका स्थान: यहाँ गिरी थी मां सती की बाईं आंख, गुफा के अंदर होते हैं अलौकिक नेत्र के दर्शन

Author Amit jha|Edited by Divyanshu Prashant
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मां चंडिका स्थान | Prabhat Khabar Network

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बिहार के मुंगेर जिले में स्थित ऐतिहासिक मां चंडिका स्थान देश के सबसे जागृत और प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. यह पावन स्थल न केवल मुंगेर या बिहार, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लाखों श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था और अलौकिक शक्तियों का केंद्र बना हुआ है.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान से क्षुब्ध होकर जब माता सती ने यज्ञकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, तब महादेव के तांडव के दौरान मां सती की बाईं आंख (नेत्र) इसी स्थान पर गिरी थी. पहाड़ की एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित मां चंडिका के इस पावन नेत्र स्वरूप के दर्शन और पूजन के लिए सालों भर देश के कोने-कोने से भक्त यहाँ पहुंचते हैं.

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गुफा के अंदर विराजमान हैं मां के नेत्र

चंडिका स्थान की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप है. यहाँ मां चंडिका का पवित्र नेत्र किसी सामान्य गर्भगृह में नहीं, बल्कि एक विशाल पहाड़ की गुफा के अंदर स्थापित है. इस प्राकृतिक गुफा के ठीक ऊपर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है. मुख्य शक्तिपीठ परिसर के भीतर मां चंडिका के अलावा अन्य सनातन देवी-देवताओं के भी अलग-अलग सुंदर और प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जो श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में संपूर्ण देव दर्शन का पुण्य प्रदान करते हैं.

सालों भर लगती है कतार, नवरात्र में उमड़ता है जनसैलाब

यूं तो चंडिका स्थान में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु अपने परिवार के मंगल, सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान इस पूरे क्षेत्र की छटा देखते ही बनती है. नवरात्र के नौ दिनों में यहाँ भक्तों की ऐसी भारी भीड़ उमड़ती है कि दर्शन के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं. सुबह की मंगला आरती से लेकर देर रात तक मंदिर के विशाल घंटों की गूंज और माता के जयकारों से पूरा मुंगेर जिला भक्तिमय और गुंजायमान रहता है.

नेत्र रोग से मुक्ति की है अटूट मान्यता

स्थानीय पुरोहितों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि चूंकि यहाँ माता सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए इस शक्तिपीठ में नेत्र संबंधी विकारों और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि यहाँ मिलने वाला माता का काजल आंखों में लगाने से कई असाध्य नेत्र रोग स्वतः ठीक हो जाते हैं. इसी अटूट विश्वास और धार्मिक महत्व के कारण हर साल इस सिद्ध पीठ की ख्याति देश-विदेश में लगातार बढ़ती जा रही है.

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