दो ग्रहों के दुर्लभ संयोग में होगी मां सरस्वती की पूजा

विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की पूजा माघ मास के शुल्क पक्ष की पंचमी तिथि पर मनायी जाती है.
रेवती नक्षत्र में होगी पूजा, सोमवार की सुबह 6.23 से पूजा का शुभ मुहूर्त
मुंगेर. विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की पूजा माघ मास के शुल्क पक्ष की पंचमी तिथि पर मनायी जाती है. इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से शाम 5 बजकर 40 मिनट तक है. वहीं इस साल बसंत पंचमी पर दो ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है.पंडित प्रमोद मिश्रा ने बताया कि इस दिन मुहूर्त में मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए. इस वर्ष मकर राशि में सूर्य और बुध एक ही राशि में रहेंगे. ऐसे में दो ग्रहों का योग के साथ ही रेवती नक्षत्र शुभ में होगा. पंचमी तिथि के इस अद्भुत संयोग में मां सरस्वती का पूजन शुभदायक माना गया है. मां सरस्वती की चार भुजाएं हैं. इसमें एक हाथ में माला, दूसरे में पुस्तक तथा दो अन्य हाथों में वीणा बजाती नजर आती है. सुरों की अधिष्ठात्री होने के कारण इनका नाम सरस्वती पड़ा. इस दिन मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश, लक्ष्मी, काॅपी, कलम व संगीत यंत्रों की पूजा फलदायी माना जाता है. देवी सरस्वती के सत्व गुण संपन्न व विद्या की अधिष्ठात्री है. ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस तिथि से अक्षरांभ, विद्यारंभ को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. पूजा करने के बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिये.
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