एमयू में एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे कई अधिकारी
Updated at : 01 Mar 2025 6:29 PM (IST)
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- दो साल पूर्व ही राजभवन ने दिया था एक से अधिक पद नहीं दिये जाने का निर्देश
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– दो साल पूर्व ही राजभवन ने दिया था एक से अधिक पद नहीं दिये जाने का निर्देश
मुंगेर. राजभवन ने दो साल पहले ही सभी विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि किसी भी अधिकारी को एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी नहीं दी जानी है, लेकिन मुंगेर विश्वविद्यालय में जहां कई अधिकारी एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वहीं खुद विश्वविद्यालय इन अधिकारियों पर ही अन्य जिम्मेदारी भी डालती जा रही है. विदित हो कि 2022 में ही राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा था. जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालयों में कई अधिकारी एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जबकि उनके कंधों पर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी भी है. ऐसे में वैसे अधिकारी, जो शैक्षणिक कार्यों से जुड़े हैं. उन्हें एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी नहीं दी जानी है. वहीं पत्र में इसके लिये अनुपालन का निर्देश भी दिया गया था.कई अधिकारी के पास एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी
एमयू में वैसे ही कई अधिकारी एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जबकि विश्वविद्यालय खुद राजभवन के आदेशों को अनदेखा करते हुये लगातार इन अधिकारियों को ही कई अन्य जिम्मेदारी दी जा रही है. हद तो यह है कि इन सभी अधिकारियों के पास पहले ही से ही शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी है. बता दें कि एमयू में लीलग अधिकारी के पास जहां इतिहास विभाग के पीजी विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है. वहीं विश्वविद्यालय ने उन्हें जमुई कॉलेज के प्राचार्य की जिम्मेदारी भी वित्तीय शक्तियों के साथ दे दिया गया है. इसके अतिरिक्त झाझा के प्राचार्य के पास विश्वविद्यालय के संपदा अधिकारी का पद है. जबकि उनके पास आइआरपीएम विषय के विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी है. इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के पीआरओ के पास जहां कुलपति के ओएसडी का पद है. वहीं उनके कंधों पर ई-लाइब्रेरी की जिम्मेदारी भी है. अब ऐसे में विश्वविद्यालय में चल रहे कार्यों और विभागों में विद्यार्थियों को मिल रहे शिक्षा का अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है.बिना पद सृजन के ही पीजी और शोध
मुंगेर. एमयू में जहां कई पीजी विभागाध्यक्षों के कंधों पर विश्वविद्यालय के कई पदों की जिम्मेदारी है. वहीं पिछले 4 साल से विश्वविद्यालय का पीजी और शोध बिना पद सृजन के ही चल रहा है. विश्वविद्यालय द्वारा 2021 में पीजी के 20 विभाग खोले गये. वहीं साल 2023 में पीएचडी की पढ़ाई आरंभ की गयी, लेकिन एमयू के पीजी विभाग बिना पद सृजन के ही चल रहा है. हद तो यह है कि बिना पद सृजन वाले पीजी विभागों में ही तीन सत्र भी समाप्त हो चुके हैं. जबकि एक सत्र समाप्ति की ओर चल रहा है. बता दें कि सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति प्रो. रणजीत कुमार वर्मा के 12 पीजी स्कूलों के प्रस्तावों के अनुसार ही लगभग 115 पदों का सृजन किया गया. जिसे बाद में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पीजी स्कूलों की मान्यता नहीं होने के कारण स्थगित कर दिया गया और इन पदों को पीजी विभागों के लिए दे दिया गया, लेकिन लगभग चार साल बाद भी अबतक सरकार से एमयू के 20 पीजी विभागों के लिये पद सृजन की स्वीकृति नहीं मिल पायी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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