बदहाली : दिन में जल रही हाइमास्ट व स्ट्रीट लाइट, बर्बाद हो रही बजली, निगम उदासीन

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बदहाली : दिन में जल रही हाइमास्ट व स्ट्रीट लाइट, बर्बाद हो रही बजली, निगम उदासीन

मुंगेर नगर निगम के 45 वार्ड को जगमग करने के लिए लगी हैं 11,500 से अधिक स्ट्रीट लाइट व 90 से अधिक हाइमास्ट लाइट

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– शहर में लगी है 90 से अधिक हाइमास्ट लाइट व 11,500 से अधिक स्ट्रीट लाइट

– मुंगेर निगम पर विद्युत विभाग का बकाया है 2 करोड़ 60 लाख रुपया

मुंगेर. विद्युत वितरण कंपनी उपभोक्ताओं को आवश्यकता के अनुरूप बिजली खर्च करने की सलाह देती है. केंद्र व राज्य सरकार लोगों को बिजली बचाने के लिए जागरूक करने को अभियान चला रही है. लेकिन नगर निगम मुंगेर न तो विद्युत विभाग की सलाह पर ध्यान दे रहा है और न ही सरकार के बिजली बचाओ अभियान से जुड़ रहा है. हालात यह है कि मुंगेर शहर में लगी हाइमास्ट व स्ट्रीट लाइटें दिन में भी जलती रहती है और हजारों यूनिट बिजली की बर्बादी हो रही है. इसके कारण एक ओर जहां निगम पर बिजली बिल का बोझ बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग को समय पर बिल का भुगतान नहीं होने से राजस्व की बड़ी क्षति हो रही है.

यहां दिन में भी जलती है स्ट्रीट लाइट व हाइमास्ट लाइट

मुंगेर नगर निगम में 45 वार्ड हैं और इसे जगमग करने के लिए 11,500 से अधिक स्ट्रीट लाइट व 90 से अधिक हाइमास्ट लाइट लगायी गयी है. निगम प्रशासन ने इसे लगाने के लिए पानी की तरह राशि बहा दिया, वहीं दूसरी ओर एक बड़ी राशि बिजली बिल भुगतान पर खर्च हो रही है, लेकिन निगम प्रशासन बिजली खपत पर लगाम लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर सकी. यह एक ऐसा शहर है जहां दिन में भी हाइमास्ट लाइट व स्ट्रीट लाइट आपको जलती हुई मिलेगी. जानकारों की मानें, तो एक स्ट्रीट लाइट औसतन 250 वाट बिजली की खपत करती है. यदि 200 लाइट भी दिन में पांच घंटे जलती है, तो हर दिन सैकड़ों यूनिट बिजली का दुरुपयोग होता है. इस अनुपात में आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि शहर में दिन में जितनी स्ट्रीट लाइट जलती रहती है, उससे कितनी बिजली की बर्बादी हो रही है. इससे विभाग को राजस्व की हानि भी हो रही है.

जिम्मेदारों की लापरवाही से बर्बाद हो रही बिजली

शहर में सिर्फ नयी लाइट लगाने पर चर्चा होती है. इन्हें बुझाने या बेमतलब के जलने से रोकने की चिंता निगम प्रशासन को नहीं रहती है. दिन में स्ट्रीट लाइट जली रहने से खराब होने की आशंका भी अधिक रहती है. जबकि बिजली बिल की राशि भी बढ़ती चली जा रही है, लेकिन इन लाइटों को बुझाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है. हद तो यह है कि जिस जनता के लिए शहर में स्ट्रीट लाइट लगायी गयी है, वह भी दिन लाइट बुझाने के प्रति लापरवाह बनी रहती है.

निगम पर है विद्युत विभाग का 2.60 करोड़ रुपये बकाया

नगर निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण एक ओर जहां बिजली की बर्बादी रुकने का नाम नहीं ले रही है. वहीं दूसरी ओर बिजली बिल का बोझ भी निगम पर बढ़ता ही चला जा रहा है. विद्युत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम पर विद्युत विभाग का बिजली बिल मद में 2.60 करोड़ रुपये बकाया है. इसकी वसूली को लेकर विभाग की ओर से निगम प्रशासन को लगातार नोटिस भेजा जा रहा है.

कहते हैं जानकार

विद्युत विशेषज्ञों की मानें तो स्ट्रीट लाइटों की टाइमिंग को कंट्रोल पैनल से ऑटोमेटिक नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए शहर में लगे स्ट्रीट लाइटों की टाइमिंग को कंट्रोल पैनल लगा कर उसके माध्यम से नियंत्रित किया जाना चाहिए. अगर यह तत्काल संभव नहीं है तो जहां भी स्ट्रीट लाइट लगी है, वहां स्विच सिस्टम से वार्ड पार्षदों को जिम्मेदारी दी जाये कि हर मुहल्ले में इसे बुझाने के लिए दो-तीन शहरवासियों को शाम में स्विच ऑन करने व सुबह में स्विच बंद करने की जिम्मेदारी दें, ताकि फालतू में विद्युत ऊर्जा की बर्बादी रोकी जा सके.

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Birendra Kumar Sing

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By Birendra Kumar Sing

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