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योग के रूप में हुआ भारतीय संस्कृति की मूल भावना का सृजन

Updated at : 21 Jun 2025 10:59 PM (IST)
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योग के रूप में हुआ भारतीय संस्कृति की मूल भावना का सृजन

सरस्वती विद्या मंदिर मुंगेर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर योग शिविर सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया

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मुंगेर .

सरस्वती विद्या मंदिर मुंगेर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर योग शिविर सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. बच्चों को जहां योग प्रशिक्षक द्वारा योग कराया गया, वहीं दूसरी ओर वक्ताओं ने योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की अपील की. कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि पतंजलि एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, वहीं समापन योग संकल्प एवं शांति मंत्र से हुआ. सदर बीडीओ आरके राघव ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना का सृजन योग के रुप में हुआ है. अपने जीवन और कर्मों को सही दिशा प्रदान करना ही योग है. मुंगेर विभाग के प्रचारक देवेंद्र कुमार ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का लक्ष्य व्यक्तित्व विकास और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करना होता है और यह योग द्वारा ही संभव है. योग में आसन, प्रणायाम और ध्यान का महत्व है. प्रधानाचार्य संजय कुमार सिंह ने कहा कि योग से हमें ऊर्जा की अनुभूति होती है. जिसके बल पर हम जीवन में आगे बढ़ते हैं. योग से मन शांत, चित्त प्रसन्न एवं स्मरण शक्ति का भी विकास होता है. योग हमारी प्राचीन परंपरा है. यह शारीरिक व मानसिक विकारों को दूर कर स्वस्थ व्यक्तित्व के निर्माण में सहायक है. शारीरिक शिक्षक चंद्रशेखर कुमार के निर्देशन में छात्र छात्राओं को भस्त्रिका, कपालभाती, अनुलोम-विलोम, उज्जायी प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, वज्रासन, शशकासन, मंडूकासन, ताड़ासन अर्द्धकटि चक्रासन, सूर्य नमस्कार आदि कराया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIRENDRA KUMAR SING

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