कचरा निष्पादन को लेकर मुंगेर में 13.75 करोड़ से शीघ्र शुरू होगा एमआरएफ सेंटर व कंपोस्टर यूनिट का निर्माण कार्य

Published by :BIRENDRA KUMAR SING
Published at :27 Apr 2026 7:24 PM (IST)
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कचरा निष्पादन को लेकर मुंगेर में 13.75 करोड़ से शीघ्र शुरू होगा एमआरएफ सेंटर व कंपोस्टर यूनिट का निर्माण कार्य

मेटेरियल रिकवरी फैसलिटी(एमआरएफ) सेंटर एवं कंपोस्टर यूनिट स्थापित किया जायेगा.

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– नगर निगम और शिवालिका एजेंसी के बीच हुआ एकरारनामा, 31 मार्च 2027 तक पूरा करना है काम

मुंगेर

मुंगेर शहर वासी खास कर चुरंबा स्थित डंपिंग यार्ड के आस-पास दर्जनों मुहल्लेवासियों के लिए यह समाचार खुशखबरी भरी है. क्योंकि कचरा निष्पादन को लेकर वर्षों से लंबित पड़े मेटेरियल रिकवरी फैसलिटी(एमआरएफ) सेंटर और कंपोस्टर यूनिट स्थापित करने के लिए नगर निगम और निर्माण एजेंसी शिवालिका प्राइवेट लिमिटेड के बीच एकरारनामा की कार्रवाई पूरी हो चुकी है. जिसे 31 मार्च 2027 तक एजेंसी को पूरा करने का लक्ष्य दिया है. इससे न सिर्फ कचरों के पहाड़ से जनता को मुक्ति मिलेगी, बल्कि नगर निगम को मोटे राजस्व की भी प्राप्ति होगी.

13.75 करोड़ से होगा एमआरएफ व कंपोस्टर यूनिट का निर्माण कार्य

नगर निगम प्रशासन द्वारा कचरा प्रबंधन के लिए लबे समय से चुरंबा स्थित डंपिंग यार्ड में पर्यावरण स्वच्छता को लेकर मेटेरियल रिकवरी फैसलिटी(एमआरएफ) सेंटर एवं कंपोस्टर यूनिट स्थापित किया जायेगा. यहां 1.6 एकड़ में एमआरएफ सेंट स्थापित किया जायेगा. जिसके निर्माण व मशीनरी स्थापित करने पर 10 करोड़ रूपया खर्च करने का प्रावधान किया गया है. जबकि 2.5 एकड़ में गीला कचरा निस्तारण को लेकर कंपोस्टर यूनिट स्थापित किया जायेगा. जिस पर 3.75 करोड़ रूपया खर्च करने का प्रावधान किया गया है.

31 मार्च 2027 तक पूरा करना है काम

कार्य को लेकर नगर निगम मुंगेर ने 24 अप्रैल को एकरारनामा किया. निर्माण एजेंसी को 31 मार्च 2027 तक निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है. निगम प्रशासन की माने तो एक सप्ताह के अंदर एजेंसी द्वारा चुरंबा डंपिंग यार्ड में निर्माण एजेंसी द्वारा एमआरएफ सेंटर एवं कंपोस्टर यूनिट निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जायेगा. विदित हो कि मुंगेर शहर में प्रतिदिन 70 से 80 टन सूखा व गीला कचरा निकलता है. जिसे चुरंबा स्थित डंपिंग यार्ड में डंप कर दिया जाता है. बताया गया कि एमआरएफ सेंटर से प्रतिदिन 50 टन सूखा कचरा का निस्तारण होगा और कंपोस्टर यूनिट में प्रतिदिन 50 टन गीला कचरा का निस्तारण किया जायेगा.

क्या है एमआरएफ सेंटर व कंपोस्टर यूनिट

एमआरएफ सेंटर में कई प्रकार के मशीन लगायी जाती है. जिसके माध्यम से सूखा कचरा को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उपयोगी और गैर उपयोगी सामानों को अलग-अलग किया जाता है. जबकि उसमें गीला कचरा के निष्पादन की व्यवस्था होती है. अलग-अलग मशीनों से यह काम होता है. प्लांट को चलाने के लिए करीब 118.5 हार्स-पावर का मोटर सहित अन्य मशीनरी का उपयोग होगा. इससे डिंपिंग यार्ड में पड़े सूखा व गीला कचरा का प्रबंधन किया जाता है. मशीन भी होगी, ऑफिस, वाशरूम व स्टाफ के रहने के लिए कमरे की व्यवस्था यहां रहेंगी

नगर निगम को होगी मोटे राजस्व की प्राप्ति

एमआरएफ सेंटर व कंपोस्टर यूनिट नगर निगम के आंतरिक आय का बेहतर स्रोत बनेगा. जिससे मोटे राजस्व की प्राप्ति नगर निगम को होने वाला है. इसमें सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, रिसाइकिलिंग (पुनर्चक्रण) कर उसे सीमेंट फैक्ट्रियों और अन्य रिसाइकिलिंग इकाइयों को बेचा जायेगा. जबकि गीला कचरा को री-साइकिल कर उससे जैविक खाद तैयार किया जायेगा. जिसे स्थानीय किसानों को उचित कीमत पर बेचा जायेगा. अगर अधिक जैविक खाद तैयार होगा तो उसे बाहर निर्यात किया जायेगा. जिससे निगम को राजस्व की प्राप्ति होगी.

कहते हैं नगर आयुक्त

नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि एमआरएफ सेंटर एवं कंपोस्टर यूनिट निर्माण को लेकर चयनित एजेंसी से निगम का एकरारनामा हो चुका है. शीघ्र ही एजेंसी निर्माण कार्य शुरू करेंगी. 31 मार्च 2027 तक दोनों का निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है. इसके निर्माण से न सिर्फ कचरा मुक्त शहर होगा, बल्कि निगम को आय भी प्राप्त होगा.

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कचरों के पहाड़ से मिलेगी मुक्ति, पर्यावरण होगा स्वच्छ

मुंगेर : वार्ड नंबर-19 का चुरंबा घनी आबादी वाला क्षेत्र है. जहां 11 एकड़ में निगम का कचरा डंपिंग यार्ड है. जहां आज कचरों का पहाड़ खड़ा है. जो खुले आकाश के नीचे है. डंपिंग यार्ड के चारों ओर आबादी ही आबादी है. कचरा से उठ रहे दुर्गंध व धूल से चुरंबा, नयागांव, रायसर, शंकरपुर, श्रीमतपुर, नीतिबाग, श्यामपुर, सुजावलपुर सहित 20 से 25 हजार की आबादी बुरी तरह से प्रभावित है. स्थानीय लोगों की माने तो आंखों में जलन, सर दर्द, सांस की बीमारी से यहां के लोग परेशान है. यहां का पानी भी दूषित हो गया है. क्योंकि बारिश के दिनों में कचरों में संग्रह जल सीधे भूगर्भ में प्रवेश करता है और नीचे के पानी को प्रभावित कर रहा है. हालात यह है कि डब्बा बंद पानी लोग पीने को मजबूर है. एमआरएफ सेंटर एवं कंपोस्टर यूनिट स्थापित होने से न सिर्फ कचरों के पहाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि एक बड़ी आबादी राहत की सांस लेगी. साथ पर्यावरण स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा.

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