आयुष चिकित्सकों के भरोसे जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चे, नहीं मिल रहा समुचित लाभ

Updated at : 19 Feb 2025 7:01 PM (IST)
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आयुष चिकित्सकों के भरोसे जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चे, नहीं मिल रहा समुचित लाभ

जिसके कारण जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों को राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ सही से नहीं मिल पा रहा है.

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मुंगेर

स्वास्थ्य योजनाओं के लिये आधारभूत संरचनाओं के विकास के बावजूद चिकित्सक व कर्मियों की कमी स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लगातार प्रभावित कर रही है. हाल यह है कि जहां लंबे समय से मुंगेर बिना सर्जन चिकित्सक के है. वहीं जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए चल रही राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (आरबीएसके) का संचालन आयुष चिकित्सकों के भरोसे ही हो रहा है. जिसके कारण जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों को राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ सही से नहीं मिल पा रहा है.

आयुष चिकित्सकों के भरोसे जिले में आरबीएसके की टीम

मुंगेर मुख्यालय सहित सभी 9 प्रखंडों में आरबीएसके की एक-एक टीम कार्यरत है. जिसमें नियमानुसार तो एक चिकित्सक, एक फर्मासिस्ट और एक एएनएम को होना है. लेकिन जिले में आरबीएस की टीम आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रही है. हद तो यह है कि जिला मुख्यालय में आरबीएसके टीम सहित कार्यक्रम के मॉनिटरिंग को लेकर जिला कॉडिनेटर तक का पद तक प्रभार में चल रहा है. अब ऐसे में हृदय रोग जैसे गंभीर बीमारियों वाले बच्चों के पहचान और इलाज की जिम्मेदारी आयुष चिकित्सकों के भरोसे है.

2024 में लगभग 3 हजार बीमार बच्चों की हुयी स्क्रीनिंग

वर्ष 2024 में आरबीएसके टीम द्वारा लगभग 3 हजार बीमार बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी. जिसमें जन्मजात बीमारी के 157, विभिन्न बीमारी से ग्रसित 2,643, कमजोर व कुपोषित 1,362 तथा समय के अनुरूप शारीरिक विकास नहीं करने वाले लगभग 50 बच्चों की पहचान हुई थी. जबकि आयुष चिकित्सक द्वारा जून 2024 से अबतक 20 बच्चों की जांच कर बेहतर इलाज के लिए आईजीईएमएस पटना भेजा गया है. कुल मिलाकर 2024 में अबतक जन्मजात बीमारी सहित अन्य बीमारी व कुपोषित कम बच्चों की स्क्रीनिंग हो पायी है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि आयुष चिकित्सकों को आरबीएसके टीम में लगाया गया है. साथ ही लगातार जिले के जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिये चलाये जा रहे योजना की मॉनिटरिंग की जा रही है. जिसे चिन्हित कर इलाज के लिये हायर सेंटर भी भेजा जा रहा है.

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