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ग्रीष्म अवकाश को लेकर आज से 30 जून तक एमयू के सभी कॉलेज बंद

By Prabhat Khabar Print Desk
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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
Prabhat Khabar

मुंगेर : मुंगेर विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालय राजभवन द्वारा जारी अवकाश कैलेंडर के अनुरूप 1 से 30 जून तक ग्रीष्म अवकास को लेकर बंद कर दिया गया है. कुलसचिव कर्नल विजय कुमार ठाकुर ने बताया कि कोविड-19 महामारी को लेकर सभी महाविद्यालयों में कक्षाएं लॉकडाउन के पहले फेज से ही बंद है. परंतु शिक्षक एवं सभी महाविद्यालय कर्मियों को राजभवन के आदेशानुसार मुख्यालय में ही रखा गया था.

वहीं अब अवकाश कैलेंडर के अनुरूप 1 जून से ग्रीष्म अवकास होने के कारण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के कार्यालय खुले रहेंगे लेकिन कक्षाएं पूर्व की तरह स्थगित रहेंगी.वहीं कक्षाओं के स्थगित होने के कारण शिक्षकों के मुख्यालय में रहने की अनिवार्यता समाप्त हो गयी है.

कुलसचिव ने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वैश्विक महामारी का प्रकोप अभी समाप्त नहीं हुआ है. जबकि इसके समाप्त होने की अबतक कोई सही समय सीमा तय नहीं है. इसलिए ग्रीष्मावकाश के दौरान भी सभी शिक्षक अपने-अपने विषयों के ऑनलाइन क्लास का विडियो विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर अपलोड करते रहें. ताकि इस दौरान पूर्व भी भांति छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.

वहीं उन्होंने शिक्षकों को स्वस्थ एंव जल्द होने वाले अनलॉकडाउन की शुभकानाएं दी. एलियनेशन एंड लिटरेचर विषय पर इन हाउस वेबिनार का हुआ आयोजनमुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय के सभी 17 अंगीभूत महाविद्यालयों के अंग्रेजी विभाग के शिक्षकों की गूगल मीट के जरिये 'एलियनेशन एंड लिटरेचर' विषय पर एक 'इन हाउस वेबिनार' शनिवार को आयोजित हुआ. इसकी अध्यक्षता एमयू के कॉलेज निरीक्षक सह एसकेआर कॉलेज बरबीधा के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ भवेश चंद्र पांडेय ने की.

जबकि तकनीकी पक्ष अनिंद्य पॉले, संयोजन और धन्यवाद ज्ञापन प्रिय रंजन तिवारी ने किया. वेबिनार में प्रतिभागियों ने अंग्रेजी साहित्य और खासकर आधुनिक युग के अंग्रेजी साहित्य में विलगाव के विविध आयामों की चर्चा की. इसमें साहित्य के हर युग में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर विभेद और विलगाव को रेखांकित किया गया तथा औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, युद्ध और उपनिवेश और भेदभाव आदि के कारण उत्पन्न अकेलेपन, सूनेपन और दर्द की समीक्षा की गयी.

वेबिनार के दौरान वक्ताओं ने अस्तित्ववाद, आधुनिकतावाद, उत्तर आधुनिकता, उत्तर उपनिवेशवाद आदि के संदर्भ में एलियनेशन की समीक्षा की. साथ ही वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सोशल डिस्टैंसिंग, पैनडेमिक और साहित्य विषय पर भी चर्चा की गयी. वहीं इस दौरान डॉ अजय कुमार, डॉ अभिमन्यु कुमार, डॉ रिम्पी सरकार, तौसीफ मोहसिन, सफे दानिश और डॉ अतनु पॉल ने भी अपने विचार रखे.

Posted bY Pritish Sahay

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