स्मार्ट सिटी का सपना अभी अधूरा

Updated at :12 Jan 2017 5:36 AM
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स्मार्ट सिटी का सपना अभी अधूरा

सर्वेक्षण. स्वच्छता मानक को पूरा नहीं कर पा रहा मुंगेर नगर निगम स्मार्ट सिटी बनने की कवायद में लगा मुंगेर नगर निगम स्वच्छता मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा. शहर में न तो कहीं कूड़ेदान है और न ही डंपिंग यार्ड की समुचित व्यवस्था. डोर टू डोर कचरा संग्रह कुछ खास घरों तक ही […]

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सर्वेक्षण. स्वच्छता मानक को पूरा नहीं कर पा रहा मुंगेर नगर निगम

स्मार्ट सिटी बनने की कवायद में लगा मुंगेर नगर निगम स्वच्छता मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा. शहर में न तो कहीं कूड़ेदान है और न ही डंपिंग यार्ड की समुचित व्यवस्था. डोर टू डोर कचरा संग्रह कुछ खास घरों तक ही सिमट कर रह गया है तो शहर का हर चौक-चौराहा अघोषित रूप से निगम का डंपिंग यार्ड बना है. जहां कहीं पाक्षिक तो कहीं मासिक कूड़े का उठाव होता है. बुधवार को भारत सरकार के क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के दल ने नगर में स्वच्छता की स्थिति पर असंतोष जताया.
मुंगेर : प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर पांच वर्ष पूर्व नगर परिषद से नगर निगम का दर्जा तो प्राप्त कर लिया. लेकिन नागरिक सुविधाओं के मामले में यह शहर अब भी निचले पायदान पर है. शहरवासियों को साफ-सुथरा नगर, शुद्ध पेयजल, रोशनी, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम की सुविधा नहीं मिल पा रही. पेयजल के मामले में तो यह शहर काफी पीछे है जहां आज भी लोगों को चापानल व कुंआ के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा. वहीं स्वच्छता के मामले में भी स्थिति बदतर है. जगह-जगह कूड़ों के ढेर शहर की पहचान बन गयी है. यही कारण है कि पिछले एक सप्ताह के बेहतर सफाई व्यवस्था के बावजूद क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआइ)की टीम स्वच्छता के दृष्टिकोण से इस शहर को मानक के अनुरूप नहीं मान रहा.
पांच मानकों का हो रहा सर्वे : सीनियर एसेसर श्यानतन चटर्जी का कहना है कि मुंगेर शहर में तीन दिनों तक स्वच्छता सर्वेक्षण का कार्य करेगी. जिसमें मुंगेर नगर निगम एवं जमालपुर नगर परिषद शामिल है. सर्वेक्षण में कूड़ा उठाव, डंपिंग यार्ड, साफ-सफाई (झाड़ू), खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ), प्रोसेसिंग एंड डिस्पोजल, कैपेसिटी बिल्डिंग सहित विभिन्न बिंदुओं का आकलन किया जा रहा है. जिसका रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है. जिसे क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को रिपोर्ट भेजी जायेगी.
शहर में नहीं लगा है कूड़ेदानी : टीम के सदस्यों की मानें तो शहर में कहीं भी कूड़ादानी नहीं दिखी. लोग खुले में ही कचरा फेंकते हैं. अधिकांश जगहों पर कूड़ेदानी नहीं रहने के कारण अघोषित डंपिंग यार्ड बन गया है. सर्वेक्षण टीम के सदस्यों ने कटघर मुहल्ले में कूड़ा-कचरा देख कर नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुंगेर शहर में डंपिंग की सुविधा नहीं है. जहां-तहां कूड़ा कचरा को फेंक दिया जाता है. इसके साथ ही उन्होंने वार्ड नंबर 3, 9, 11, 20, 22, 36 सहित अन्य वार्डों का भी भ्रमण किया. उन्होंने यह भी जानने का प्रयास किया कि रोजाना नगर निगम द्वारा डोर टू डोर कचरा प्रबंधन होता है या नहीं.
टीम ने लिया शहर की सफाई व शौचालय का जायजा, रहे असंतुष्ट
नगर निगम में रिपोर्ट बनाते सीनियर एसेसर.
डीजे कॉलेज रोड स्थित डंपिंग यार्ड.
क्यूसीआइ की टीम ने किया सर्वेक्षण
भारत सरकार के क्यूसीआइ की टीम ने बुधवार को नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया. टीम में शामिल सीनियर एसेसर श्यानतन चटर्जी, जूनियर एसेसर प्रीतम परमार व पुष्पेश ने शहर के सब्जी मार्केट, कटघर, तोपखाना बाजार, अस्पताल रोड, मुख्य बाजार, डीजे कॉलेज रोड स्थित कॉलोनी सहित कई मुहल्लों में जाकर स्थलीय अवलोकन किया. टीम के सदस्य जहां शहर में साफ-सफाई, कूड़ा का उठाव, डोर टू डोर कचरा प्रबंधन, खुले में शौच, स्वच्छता जागरूकता के लिए निगम द्वारा चलाये जा रहे अभियान का भी अवलोकन किया. टीम में शामिल एसेसर को कहीं भी स्वच्छता से संबंधित बैनर-पोस्टर नहीं दिखे. जूनियर एसेसर प्रीतम परमार ने कहा कि मानक के अनुसार स्वच्छता का मुंगेर का अभाव है. साथ ही स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता की भी कमी पायी गयी. उन्होंने कहा कि निगम द्वारा जो लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए उसकी भी स्थिति ठीक नहीं है.
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