एमयू : अनियमित सत्र से स्नातक सेमेस्टर तीन में नामांकन से पहले ड्रॉप आउट हो गये आठ हजार विद्यार्थी

मुंगेर विश्वविद्यालय में इन दिनों शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्य दोनों ही पूरी तरह बेपटरी हो चुके हैं. एक ओर जहां खुद एमयू के सीनेटर विश्वविद्यालय में फैली अनियमितताओं की पोल खोल रहे हैं
मुंगेर.
मुंगेर विश्वविद्यालय में इन दिनों शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्य दोनों ही पूरी तरह बेपटरी हो चुके हैं. एक ओर जहां खुद एमयू के सीनेटर विश्वविद्यालय में फैली अनियमितताओं की पोल खोल रहे हैं. वहीं कॉलेजों में अनियमित सत्र और रिजल्ट प्रकाशन में देरी के कारण विद्यार्थी भी एमयू में नामांकन से दूर हो रहे हैं. इसका अंदाजा केवल इसी से लगाया जा सकता है कि सत्र 2024-28 स्नातक सेमेस्टर-2 का रिजल्ट जारी होने में 5 माह के लंबे इंतजार के कारण सेमेस्टर-3 में नामांकन से पहले ही लगभग आठ हजार विद्यार्थी ड्रॉप आउट हो चुके हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली अब खुद सवालों के घेरे में आ रही है.2024-28 स्नातक सेमेस्टर-2 में 34,967 ने लिया नामांकन, 30,623 ने ही भरा फॉर्म
एमयू के सत्र 2024-28 स्नातक सेमेस्टर-2 में साल 2025 में कुल 34,967 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया था. जिसमें कला संकाय में 3,004, विज्ञान संकाय में 4,625 तथा वाणिज्य संकाय में 338 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया था. इसके बाद अगस्त 2025 में उक्त सत्र में 30,623 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा फॉर्म भरा. जिसमें कला संकाय में 2,799, विज्ञान संकाय में 3,146 तथा वाणिज्य संकाय में 278 विद्यार्थियों ने परीक्षा फॉर्म भरा. जबकि लगभग 4 हजार विद्यार्थी कॉलेजों से चले गये. हलांकि उक्त सत्र की परीक्षा विश्वविद्यालय द्वारा सितंबर 2025 में ली गयी, लेकिन इसका रिजल्ट विश्वविद्याल द्वारा 5 माह बाद फरवरी 2026 में जारी किया. इसके बाद अब विश्वविद्यालय द्वारा 24 से 28 फरवरी तक उक्त सत्र में नामांकन लिया गया. जिसमें मात्र 21,429 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया. इसमें कला संकाय में 18,308, विज्ञान संकाय में 2,940 तथा वाणिज्य संकाय में 181 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया है. अब ऐसे में 6 माह के सेमेस्टर का लगभग 11 माह लंबा होने के कारण उक्त सत्र के सेमेस्टर-3 में नामांकन से पहले ही लगभग 8 हजार विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़कर जा चुके हैं. जो खुद विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.
अनियमित सत्र और लंबी नामांकन प्रक्रिया के कारण दूर हो रहे विद्यार्थी
एमयू में ड्रॉप आउट विद्यार्थियों की संख्या केवल एक सत्र में लगभग 8 हजार है. जबकि यह हाल स्नातक और पीजी के लगभग सभी सत्रों का है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने आंकड़ों के बीच भी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का दावा कर रहा है. हद तो यह है कि जनवरी माह में एमयू के सीनेटर डॉ कुंदनलाल कॉलेजों में प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करने के लिये अनशन पर भी बैठे. जिसे खुद कुलपति प्रो संजय कुमार द्वारा आश्वासन दिया गया कि जल्द ही कॉलेजों में प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया जायेगा, लेकिन अनशन समाप्त होने के बाद यह मामला भी अब विश्वविद्यालय की उदासीनता का भेंट चढ़ चुका है. हद तो यह है कि पिछले एक साल में एमयू के स्नातक से लेकर पीजी तक के सभी सत्र लगभग पूरी तरह अनियमित हो चुके हैं. एमयू में लंबी और ऊबाऊ नामांकन प्रक्रिया तथा रिजल्ट प्रकाशन में लगातार हो रहे विलंब के कारण अब विद्यार्थी भी एमयू के कॉलेजों में नामांकन लेने सेे कतराने लगे हैं.
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