ध्यान योग से नष्ट होता है पाप : स्वामी अच्युतानंद

फोटो संख्या : 13फोटो कैप्सन : प्रवचन देते बाबा प्रतिनिधि , जमालपुरगुरु निवास डीडी तुलसी भवन में चल रहे संत मत सत्संग ध्यान-साधना शिविर के चौथे दिन शुक्रवार को स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने योग के गुर को बताया. उन्होंने कहा कि गुरु के बताये नियमों के अनुसार ही साधना की जानी चाहिए.स्वामी जी ने […]
फोटो संख्या : 13फोटो कैप्सन : प्रवचन देते बाबा प्रतिनिधि , जमालपुरगुरु निवास डीडी तुलसी भवन में चल रहे संत मत सत्संग ध्यान-साधना शिविर के चौथे दिन शुक्रवार को स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने योग के गुर को बताया. उन्होंने कहा कि गुरु के बताये नियमों के अनुसार ही साधना की जानी चाहिए.स्वामी जी ने कहा कि जो साधक अपने दोनों दृष्टि को समेट कर सुषुम्ना में प्रवेश करते हैं उन्हीं को ईश्वर का गायन हो पाता है. दोनों दृष्टि-धारों को शून्यगत करना ही द्रष्टि योग है. ध्यान करते करते अपने अंदर में बिंदु उदय होने से शब्द प्रकट होता है. ध्यान करने का बहुत बड़ा महत्व है. मन को वश कर शून्य गत करना ही ध्यान है. ध्यान योग से मन शून्य में स्थिर होता है. ध्यान साधना की महिमा अपरंपार है. गुरु महाराज भी हजारों भक्तों के बीच शिविर लगा कर ध्यान साधना किया करते थे. मौके पर कार्यक्रम के संयोजक विवेक तुलसी, स्वामी नरेंद्र बाबा, स्वामी भोमानंद बाबा, गौतम ब्रहमचारी, संतोष बाबा सहित सैकड़ों संतमत के अनुयायी उपस्थित थे.
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