सदर अस्पताल में मोटे धागे व संक्रमित सूई से होती है स्टीचिंग, मरीज हो सकते हैं संक्रमित
Author Prabhat khabar digital desk
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मुंगेर : सदर अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता की उपेक्षा कर काम किया जा रहा है, या यूं कहें कि सदर अस्पताल में इलाज कराने को पहुंचने वाले मरीजों में संक्रमण फैलाने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ मरीजों को ही भुगतना पड़ सकता है. यहां […]
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मुंगेर : सदर अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता की उपेक्षा कर काम किया जा रहा है, या यूं कहें कि सदर अस्पताल में इलाज कराने को पहुंचने वाले मरीजों में संक्रमण फैलाने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ मरीजों को ही भुगतना पड़ सकता है.
यहां के इमरजेंसी वार्ड में जब भी कोई ऐसा घायल मरीज आता है, जिसका कोई अंग कट-फट गया हो और उसे स्टीच करने की जरूरत होती है, तब उसे संक्रमित सूई से ही स्टीच किया जाता है. इतना ही नहीं शरीर का कोई भी भाग कटा-फटा हो, उसकी स्टीचिंग मोटे धागे से ही किया जाता है. और तो और घायलों को यहां पर टिटवेक की सूई भी नहीं लगायी जा रही है.
संक्रमित सूई से किया जाता है घायलों का स्टीच: सुनने में भले ही यह बात अटपटा लगता हो कि सदर अस्पताल में संक्रमण फैलाने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. किंतु इसे नकारा भी नहीं जा सकता है.
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में स्टीच करने वाले सूई का बिना स्टालाइजेंशन किये ही इसी सूई से दूसरे घायलों का भी स्टीच कर दिया जाता है. एक मरीज को स्टीच करने के बाद सूई में जो खून लगा रहता है, उसे यहां के ड्रेसर सिर्फ कॉटन से पोछ मात्र देते हैं और फिर दूसरे घायल का उसी सूई से स्टीच कर देते हैं. ऐसे में वह सूई संक्रमित ही रह जाता है. जिसके कारण दूसरे घायल मरीज को संक्रमण होने की संभावना बनी रहती है. बावजूद इस मामले पर अस्पताल प्रशासन शायद गंभीर नहीं दिख रही है.
शरीर कटे-फटे घायलों को नहीं दिया जाता है टिटवेक का इंजेक्शन
अमूमन शरीर का कोई भी अंग कट-फट जाने पर उसे सबसे पहले टिटवेक का इंजेक्शन दिया जाता है, ताकि उसे टिटनेस का संक्रमण न हो जाये. किंतु सदर अस्पताल में पिछले 10 दिनों से टिटवेक का इंजेक्शन ही नहीं है. जिसके कारण जब भी ऐसा घायल मरीज सदर अस्पताल आया, जिसके शरीर का कोई अंग कट-फट गया हो तो उसे टिटवेक क��� इंजेक्शन ही नहीं दिया जा रहा है. बिना टिटवेक का इंजेक्शन दिये ही उसे संक्रमित सूई से स्टीच भी कर दिया जाता है. ऐसे में तो घायलों में संक्रमण होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है. बावजूद अस्पताल प्रशासन अब तक टिटवेक का इंजेक्शन उपलबध करा पाने में विफल साबित हो रही है.
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