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चमकी बुखार का एक अौर हीट स्ट्रोक के पांच नये मरीज हुए भर्ती, चल रहा इलाज

Updated at : 20 Jun 2019 7:23 AM (IST)
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चमकी बुखार का एक अौर हीट स्ट्रोक के पांच नये मरीज हुए भर्ती, चल रहा इलाज

मुंगेर : जिले में हीट स्ट्रोक थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. लगातार एक के बाद एक मरीज हीट स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं. जिले भर में अब तक कुल 22 लोग हीट स्ट्रोक के शिकार हो चुके हैं. जिसमें से अब तक हीट स्ट्रोक से पीड़ित 5 लोगों की मौत भी […]

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मुंगेर : जिले में हीट स्ट्रोक थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. लगातार एक के बाद एक मरीज हीट स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं. जिले भर में अब तक कुल 22 लोग हीट स्ट्रोक के शिकार हो चुके हैं. जिसमें से अब तक हीट स्ट्रोक से पीड़ित 5 लोगों की मौत भी हो चुकी है. बुधवार को भी हीट स्ट्रोक से पीड़ित कुल पांच मरीजों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया गया. ऐसे में जब तक तापमान का पारा सामान्य नहीं हो जाता है, तब तक आमजनों को सावधान रहने की जरूरत है. बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

हीट स्ट्रोक के 5 और चमकी बुखार एक नये मरीज हुए भर्ती: वैसे तो सदर अस्पताल में अब तक हीट स्ट्रोक के कुल 22 मरीजों को भर्ती किया जा चुका है. जिसमें बुधवार को हीट स्ट्रोक के कुल 5 नये मरीज और चमकी बुखार के एक नये मरीज को भर्ती किया गया. अस्पताल में भर्ती होने वालों में रामदिरी निवासी देवन मंडल की 42 वर्षीय पत्नी सुलेखा देवी, चुरम्बा निवासी मो.
इजहार की एक वर्षीय पुत्री खुशी, सिंघिया निवासी मो कासिम की 17 वर्षीय पुत्री आफरीन परवीन, शाहजुबै रोड निवासी मो. डब्लू की 18 वर्षीय पुत्री मुस्कान तथा लल्लूपोखर निवासी मुकेश कुमार शामिल हैं. इसके अलावे बरियारपुर के सरस्वती नगर निवासी रंजीत मंडल का 5 वर्षीय पुत्र दिलप्रीत कुमार चमकी बुखार से पीड़ित पाया गया. जिसे बुधवार को सदर अस्पताल में भरती कराया गया है.
क्या है हीट स्ट्रोक: चिकित्सक की मानें तो मनुष्य के शरीर का तापमान सामान्य अवस्था में 98.6 डिग्री फरेनहाइट होना चाहिए. जब मनुष्य का तापमान इसके ऊपर जाने लगता है तो उसे बुखार कहा जाता है. हीट स्ट्रोक होने पर मनुष्य के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है,
यह आसानी से कम नहीं होता. अगर किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 100 डिग्री फॉरेनहाइट के ऊपर जाने लगे तो घरेलू उपचार से उसके तापमान को कम करना चाहिए. लेकिन अगर उसका तापमान कम नहीं हो रहा हो और बढ़ता ही जा रहा हो तो उसे डॉक्टरी सहायता पहुंचानी चाहिए. मेडिकल साइंस के अनुसार अगर मनुष्य का तापमान 102-103 फॉरेनहाइट के ऊपर जाने लगे तो फिर खतरनाक स्थिति उत्पन्न होने लगती है.
इस अवस्था के ऊपर तापमान जाने पर व्यक्ति अनर्गल बातें करने लगता है, उसके मष्तिष्क में गड़बड़ी उत्पन्न हो सकती है तथा उसके कई अंग खराब हो सकते हैं. हीट स्ट्रोक में अगर मरीज के तापमान को कम नहीं किया गया तो मरीज के शरीर का तापमान बढ़ता ही जाता है, जिसके कारण मरीज को कुछ भी हो सकता है, यहां तक कि मौत भी.
हीट स्ट्रोक के क्या हैं कारण: हीट स्ट्रोक तेज धूप या अत्यधिक गर्मी व तापमान के कारण होता है. लेकिन हीट स्ट्रोक के और भी कई कारण होते हैं. निर्जलीकरण, थाइराइड में असंतुलन पैदा होना, शरीर में रक्त शर्करा में कमी आना (ऐसा मधुमेह के मरीजों में होता है), शराब के सेवन से, उच्च रक्तचाप या अवसाद आदि के उपचार में इस्तेमाल के लिए ली जाने वाली दवाओं की वजह से हीट स्ट्रोक होता है.
गर्मी के दिनों में या तेज धूप में काम करने से यदि आपको चक्कर आने लगे, या उलटी-मितली जैसा लगे, आपका रक्त चाप अचानक से कम होने लगे और आपको तेज बुखार हो जाये तो समझ लीजिये कि आप हीट स्ट्रोक के शिकार हो चुके हैं.
हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए तेज धूप में निकलने से बचें. अगर तेज धूप में निकलना जरूरी हो तो निकलते वक्त छाता लगा लें या टोपी पहन लें. संभव हो तो आंखों पर धूप से बचने वाला चश्मा भी लगा लें. हीट स्ट्रोक से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप निर्जलीकरण की अवस्था में न पहुंच जाएं. निर्जलीकरण से बचने के लिए यह अति आवश्यक है कि आप खूब मात्रा में पानी पीते रहें. अक्सर लोग तभी पानी पीते है, जब उन्हें प्यास लगती है.
लेकिन ऐसा करना हर दृष्टि से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं है. पानी न सिर्फ आपकी प्यास बुझाती है बल्कि यह आपके शरीर के भीतर के विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालता है. पानी की कमी से आपकी त्वचा बेजान लगने लगती है एवं आपके बाल कमजोर होकर झड़ने लगते है. बहुत से लोग पानी पीने की बजाय चाय-कॉफी पीने लगते है, जो कि सरासर गलत है.
ठंड के दिनों में जहां चाय-कॉफी पीना लाभदायक होता है, वहीं गर्मी के दिनों में इनका सेवन नुकसानदेह होता है. चाय-कॉफी के बजाय आप फलों के रस पिया करें अथवा गन्ने का जूस पिया करें. नारियल का पानी पीना भी गर्मी के दिनों में बहुत लाभ पहुंचता है और हीट स्ट्रोक से बचाता है.
इसके अलावे कच्चे आम का रस मानव शरीर का तापमान कम करने में बहुत ही प्रभावकारी माना जाता है. कच्चे आम का गुदा आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बहाल करने में बहुत ही मददगार होता है. छाछ यानी कि मट्ठा हीट स्ट्रोक में बहुत ही प्रभावकारी होता है. छाछ हीट स्ट्रोक के इलाज के लिए सबसे सफल प्राकृतिक घरेलू उपचारों में से एक है.
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