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Bihar Tourism: बिहार के इस पर्वत का समुद्र मंथन में किया गया था इस्तेमाल, आज भी मौजूद है निशान

Updated at : 23 Aug 2025 9:45 AM (IST)
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Bihar Tourism: बिहार के इस पर्वत का समुद्र मंथन में किया गया था इस्तेमाल, आज भी मौजूद है निशान

Bihar Tourism: भारत में कई ऐसे जगह है जिसका जिक्र धार्मिक ग्रंथों और पुरानी कथाओं में मिलता है. इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है बिहार के बांका का मंदार पर्वत.आइए जानते हैं इसके रोचक इतिहास और महत्व के बारे में.

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Bihar Tourism: बिहार अपनी अनोखी संस्कृति, कला और प्राचीन धार्मिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यहां की नदियां,पहाड़ और मंदिर न सिर्फ इतिहास की गवाही देते हैं बल्कि पर्यटकों को भी अपनी ओर खिंचते हैं. इन्हीं धरोहरों में से एक है मंदार पर्वत,जो धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व दोनों से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि यह पर्वत समुद्र मंथन की कथा से गहराई से जुड़ा है, इसलिए इसकी पवित्रता और भी बढ़ जाती है.आज यह जगह एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है, जहां श्रद्धा और प्राकृतिक खूबसूरती दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. अगर आप बिहार घूमने का मन बना रहे हैं, तो मंदार पर्वत की यात्रा आपके सफर को और भी खास बना देगी.

समुद्र मंथन मे किया गया था इस्तेमाल

धार्मिक ग्रंथो मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय देवताओं ने इसी पर्वत का उपयोग मथानी के रूप में किया था और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया था. पर्वत की सतह पर आज भी सांप के निशान देखने को मिलते हैं. कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां कई तालाब थे, जिनमें से कुछ अब भी मौजूद हैं.

कैसे पहुंचे मंदार पर्वत

बिहार के बांका जिले में स्थित मंदार पर्वत, भागलपुर (सिल्क सिटी) से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. रांची से इसकी दूरी करीब 350 किलोमीटर पड़ती है. इसे “मंदराचल” भी कहा जाता है और यह बौंसी नाम से भी फेमस है. यह पर्वत आज विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है.

खूबसूरत है यहां का नजारा

मंदार पर्वत हिंदू धर्म में आस्था का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि यह भगवान विष्णु का निवास स्थान है.करीब 800 फीट ऊंचे इस ग्रेनाइट पत्थर के पर्वत से प्रकृति के बेहद खूबसूरत नज़ारे दिखाई देते हैं.

ये जगह भी है खास

मंदार पर्वत की चोटी पर कई प्राचीन मंदिर बने हुए हैं, जिनमें जैन धर्म के मंदिर भी शामिल हैं. यहां का लक्ष्मी नारायण मंदिर और सीता कुंड पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं. यह पर्वत आज भी अपनी धार्मिक परंपरा और विरासत को संजोए हुए है.

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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