बिहार में गर्मी का प्रकोप: भूजल गिरने से जल रही मोटरें, बोरवेल हो रहे फेल, क्रिटिकल जोन के लिए बनेगी एसओपी

भूजल के गिरते स्तर को बेहतर करने के लिए क्रिटिकल इलाकों में निजी बोरिंग पर भी अंकुश लगेगा. इसके लिए समय तय होगा और निजी बोरिंग कराने में प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा.
प्रहलाद कुमार , पटना. बिहार में गर्मी के दौरान भूजल का स्तर तेजी से गिरने लगता है. 2023 में 253 क्रिटिकल पंचायत हैं, जहां भूजल की पेरशानी हो रही है. पीएचइडी को भूजल की मिली रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 24 वार्डों में मोटर जले हैं और 19 वार्डों में बोरिंग फेल हुई है. इस कारण से लोगों को गर्मी में पानी संकट से जूझना पड़ता है. हाल में भूजल को बेहतर करने के लिए सभी राज्यों के साथ मीटिंग हुई है. इसके बाद केंद्र सरकार ने मीटिंग में भूजल को दुरुस्त करने के लिए सभी राज्यों को एसओपी जारी किया है, जिसमें भूजल संकट को दूर करने को लेकर सभी बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी गयी है, ताकि योजना बना कर भूजल स्तर को और बेहतर किया जा सके.
बोरबेल फेल होने में गया के 16 और नवादा के तीन वार्ड शामिल हैं. जहां बोरबेल फेल हो रहा है. यानी इन वार्डों की हालत गंभीर है. वहीं, अरवल दो, गया दो, नवादा पांच, जहानाबाद एक, आरा तीन, औरंगाबाद एक और जमुई में मोटर जलने की 10 शिकायतें आयी हैं. अधिकारियों के मुताबिक जहां मोटर जल रहे हैं वहां पानी की कमी के कारण से मोटर देर तक चलता है. इसके बावजूद पानी की मांग पूरी नहीं हो रही है. इस कारण से मोटर जल रहे हैं.
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक भोजपुर एक, मुजफ्फरपुर एक, नालंदा एक, पटना तीन, वैशाली दो, शेखपुरा एक व समस्तीपुर के एक ब्लॉक अतिदोहन वाले क्षेत्र में घोषित किये गये हैं. यहां पानी की निकासी तेजी से हो रही है, लेकिन पानी वापस धरती में नहीं जा है. अधिकारियों के मुताबिक यहां पर भूजल का स्तर सबसे पहले खत्म होगा. क्रिटिकल जोन में जहानाबाद दो, मुजफ्फरपुर एक , नालंदा एक, पटना सदर एक, समस्तीपुर एक एवं वैशाली के दो ब्लॉक हैं. यहां पर भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है. वहीं, 46 ब्लॉक ऐसे भी हैं,जो सेमी क्रिटिकल जोन में घोषित किये गये हैं. यहां भूजल की निकासी होती है, लेकिन जमीन में पानी को भेजने की प्रकिया 50 प्रतिशत से भी कम रहती है. इन ब्लॉक की समीक्षा नियमित हो रही है.
सभी तरह के जलस्रोत की पहचान करना, पानी की आपूर्ति और मांग की तकनीकी रूप से रिपोर्ट बनायी जाये, बारिश का कितना पानी बह जाता है यानी धरती में वापस नहीं पहुंचता है. गांव भूजल के मामले में किस जोन है, पानी के स्रोत की सुरक्षा करना. वहीं, इसकी रिपोर्ट के आधार पर कितनी बोरिंग हर साल फेल हो रही हैं और जलस्रोतों पर से अतिक्रमण हटाने व भूजल की नियमित निगरानी करने का काम करना शामिल है.
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भूजल के गिरते स्तर को बेहतर करने के लिए क्रिटिकल इलाकों में निजी बोरिंग पर भी अंकुश लगेगा. इसके लिए समय तय होगा और निजी बोरिंग कराने में प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा. बोरिंग की समय-सीमा तय करने के लिए अगले माह मीटिंग होगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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