बाघों की बढ़ती आबादी के बीच बड़ा कदम, पर्सा में ‘बाघ मित्र’ सिखाएगा सुरक्षित रहना

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सांकेतिक तस्वीर

नेपाल के पर्सा राष्ट्रीय निकुंज में बाघों की संख्या में 30 की वृद्धि हुई है, जो अब 71 हो गई है. इस बढ़ती आबादी के साथ, मानव-बाघ संघर्ष को कम करने और सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए 'बाघ मित्र' अभियान का विस्तार किया जा रहा है. यह अभियान स्थानीय समुदायों को वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करेगा.

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Raxaul News: भारत की सीमा से सटे नेपाल के पर्सा राष्ट्रीय निकुंज में बाघों की संख्या बढ़कर 71 हो गई है. बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मानव-बाघ सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए ‘बाघ मित्र’ अभियान को विस्तार देने की तैयारी की जा रही है. अभियान के जरिए स्थानीय समुदाय में वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर जोर दिया जाएगा.

पर्सा निकुंज में 30 बढ़े बाघ

पर्सा राष्ट्रीय निकुंज के प्रमुख रामचंद्र खतिवड़ा के अनुसार निकुंज में पहले 41 बाघ थे. हाल में की गई बाघ गणना में इनकी संख्या बढ़कर 71 हो गई है. यानी पिछले आंकड़ों की तुलना में 30 बाघों की वृद्धि दर्ज की गई है.

मानव-बाघ सहअस्तित्व मजबूत करेगा ‘बाघ मित्र’ अभियान

रामचंद्र खतिवड़ा ने बताया कि बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नागरिकों के वन्यजीवों के प्रति सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ‘बाघ मित्र’ अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य मानव-बाघ सहअस्तित्व को मजबूत करने के साथ वन्यजीवों से होने वाली मानवीय क्षति को शून्य तक लाना है.

पर्सा, बारा और मकवानपुर में समुदाय स्तर पर अभियान

अभियान जंगल से जुड़े पर्सा, बारा और मकवानपुर जिलों के डिविजन वन कार्यालयों के समन्वय से संचालित किया जा रहा है. स्थानीय लोगों की भागीदारी से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वन्यजीवों के महत्व, बाघ से बचाव के उपाय और संघर्ष की स्थिति में समाधान के तरीकों की जानकारी दी जा रही है.

साथ ही लोगों को वन्यजीवों से होने वाली क्षति की स्थिति में राहत प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया जा रहा है.

भोजन की तलाश में जंगल से बाहर आते हैं बाघ

निकुंज प्रमुख ने बताया कि कभी-कभी भोजन की तलाश में बाघ जंगल से बाहर निकल आते हैं. बाघ को देखते ही लोगों में उसके प्रति नकारात्मक धारणा बन जाती है. ऐसे में अभियान के माध्यम से लोगों को बाघ के व्यवहार और उससे सुरक्षित रहने के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि बाघ मनुष्य का दुश्मन नहीं है, उसका भी अपना अस्तित्व है. बाघों की मौजूदगी को पर्यटन क्षेत्र के विकास से भी जोड़कर देखा जा सकता है.

जंगल में आग और शिकार से प्रभावित होता है प्राकृतिक आवास

रामचंद्र खतिवड़ा के अनुसार जंगल में आग लगाना, वन्यजीवों का अवैध शिकार और चोरी-तस्करी जैसी गतिविधियों से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है. ऐसी स्थिति में वन्यजीव भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगल से बाहर निकल सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा होती है.

उन्होंने कहा कि ऐसे संघर्ष को कम करने में स्थानीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

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मनोज कुमार गुप्ता

लेखक के बारे में

By मनोज कुमार गुप्ता

मनोज कुमार गुप्ता बीते 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट, रेडियो और डिजिटल माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सीमा सुरक्षा और नेपाल की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं. सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि के साथ वे क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं.

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