सीपीआर से लेकर डूबने के बाद बचाव तक, युवा आपदा मित्र शिविर में मिला विशेष ट्रेनिंग

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प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षु

मोतिहारी में सात दिवसीय 'युवा आपदा मित्र' प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसमें युवाओं को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया गया. स्वयंसेवकों ने सीपीआर, डूबने के बाद बचाव और घायलों को सुरक्षित निकालने की तकनीकें सीखीं.

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Motihari News: एमएस कॉलेज में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय आवासीय "युवा आपदा मित्र" प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन मंगलवार को एसडीआरएफ के प्रशिक्षकों ने स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार से जुड़े विभिन्न सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए. प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी सहायता देने के लिए तैयार करना है.

 एसडीआरएफ ने कराया व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को डूबने की घटना के बाद प्राथमिक उपचार देने तथा पीड़ित को सुरक्षित सहायता उपलब्ध कराने की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया. साथ ही बीपी मशीन के सही उपयोग और घायल व्यक्ति की प्रारंभिक स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने का प्रशिक्षण भी दिया गया.

घायलों को सुरक्षित निकालने की तकनीक सिखाई

एसडीआरएफ की टीम ने स्वयंसेवकों को घायल व्यक्ति का मूल्यांकन करने, उसे सुरक्षित तरीके से उठाने और स्थानांतरित करने की विधि का अभ्यास कराया. सड़क दुर्घटना अथवा अन्य आपदा की स्थिति में घायल को घटनास्थल से सुरक्षित निकालने और अस्पताल पहुंचने से पहले आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा देने की जानकारी भी दी गई.

रक्तस्राव रोकने और हड्डी टूटने पर उपचार की जानकारी

प्रशिक्षण में रक्तस्राव रोकने की तकनीक, शरीर में धंसी वस्तु की स्थिति में प्राथमिक उपचार, टूटी हुई हड्डी पर उचित पट्टी और सहारा देने की विधि सहित कई महत्वपूर्ण जीवनरक्षक उपायों का प्रदर्शन किया गया. प्रशिक्षकों ने बताया कि सही प्राथमिक उपचार से गंभीर स्थिति में भी पीड़ित की जान बचाई जा सकती है.

सीपीआर और जीवनरक्षक कौशल पर विशेष फोकस

एसडीआरएफ के प्रशिक्षकों ने स्वयंसेवकों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी भी दी. महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. गौरव भारती ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आपदा की स्थिति में प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में तैयार करना है, ताकि वे संकट की घड़ी में समुदाय की प्रभावी सहायता कर सकें.

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अमृतेश कुमार

लेखक के बारे में

By अमृतेश कुमार

अमृतेश 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. खबर पर हमेशा पैनी नजर रखने वाले अमृतेश को क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. वर्तमान में ये डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी लेखनी के जरिए लगातार सक्रिय हैं.

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