सदर पीएचसी में मचा हड़कंप, पांच माह में एक्सपायर होने वाली दवाएं बांट रहे वेलनेस सेंटर
मोतिहारी सदर प्रखंड के वेलनेस सेंटर में रखी दवाओं के स्टॉक
Motihari Health News: मोतिहारी सदर प्रखंड के वेलनेस सेंटरों में उपलब्ध अधिकांश दवाओं की एक्सपायरी अवधि मात्र पांच माह शेष रहने से दवा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. लोगों ने दवा खरीद और वितरण प्रक्रिया की जांच की मांग की है. जानिए खबर विस्तार से...
मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट
Motihari Health News: मोतिहारी सदर प्रखंड के वेलनेस सेंटरों में दवा वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. प्रखंड के 15 वेलनेस सेंटर और पांच अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध अधिकांश दवाओं की एक्सपायरी अवधि अब मात्र पांच माह शेष रह गई है. इसे लेकर मरीजों के स्वास्थ्य और दवा प्रबंधन प्रणाली पर चिंता व्यक्त की जा रही है.
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दिसंबर 2024 में बनीं, नवंबर 2026 में होंगी एक्सपायर
स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कई दवाओं पर मैन्युफैक्चरिंग डेट दिसंबर 2024 तथा एक्सपायरी डेट नवंबर 2026 अंकित है. इसका अर्थ है कि दवाओं की कुल वैधता अवधि का बड़ा हिस्सा बीत चुका है और अब केवल पांच माह बाद ये दवाएं एक्सपायर हो जाएंगी.
नया स्टॉक उपलब्ध नहीं होने पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला स्तर से नियमित अंतराल पर दवाओं की आपूर्ति की जाती है. ऐसे में कम शेष अवधि वाली दवाओं के स्थान पर नया स्टॉक उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया, यह जांच का विषय है. लोगों ने दवा आपूर्ति प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं.
करोड़ों की खरीदारी के बावजूद पुराने स्टॉक का उपयोग
स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद करता है. इसके बावजूद यदि वेलनेस सेंटरों में कम शेष अवधि वाली दवाएं वितरित की जा रही हैं, तो यह दवा भंडारण और स्टॉक प्रबंधन व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जा सकती है.
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मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मामला
विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायरी से पहले तक दवाओं का उपयोग नियमों के अनुरूप किया जा सकता है. हालांकि बड़ी मात्रा में ऐसी दवाओं का अंतिम महीनों में वितरण स्टॉक प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है. इससे भविष्य में दवा की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
दवा खरीद और वितरण प्रक्रिया की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने दवा खरीद, भंडारण और वितरण प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि कम शेष अवधि वाली दवाएं स्वास्थ्य केंद्रों तक कैसे पहुंचीं और समय रहते नया स्टॉक क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया.
क्या कहते हैं अधिकारी?
सदर पीएचसी प्रभारी डॉ. दिलीप कश्यप ने बताया कि जिले से दवाओं की आपूर्ति मांग के अनुसार प्रत्येक तीन माह पर की जाती है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध दवा स्टॉक की जांच करने का निर्देश दिया गया है और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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