Motihari: जमीन अधिग्रहण का कार्य प्रारंभ करने के लिए एसआईएस रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है भू-अर्जन विभाग

रक्सौल हवाई अड्डा के संचालन के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा भू-अर्जन की है.
Motihari: रक्सौल.रक्सौल हवाई अड्डा के संचालन के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा भू-अर्जन की है. जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण के अथक प्रयास के बाद अंचल कार्यालय से तो सभी तरह की रिपोर्ट जिला को भेज दी गयी है, लेकिन वहां से अभी मोतिहारी भू-अर्जन कार्यालय में पेंच फंसा हुआ है. भू-अर्जन कार्यालय को अभी जमीन अधिग्रहण को लेकर एसआईएस की रिपोर्ट नहीं मिली है. भूमि अधिग्रहण के लिए सामाजिक प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट तैयार करायी जाती है. इस रिपोर्ट को तैयार करने का जिम्मेवार ए एन सिन्हा सामाजिक विज्ञान संस्थान पटना को मिली है. वहां से जिला भू-अर्जन कार्यालय को अब तक रिपोर्ट अप्राप्त है. यहां बता दे कि सामाजिक प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट विस्तृत दस्तावेज है जिसमें भूमि अधिग्रहण के कारण होने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण किया जाता है. इस रिपोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सामाजिक रूप से न्यायसंगत और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो. इसमें भूमि अधिग्रहण का उद्देश्य, प्रभावित लोगों की पहचान, सामाजिक प्रभाव, आर्थिक प्रभाव, पर्यावरणीय प्रभाव सहित अन्य बिन्दुओं पर रिपोर्ट तैयार की जाती है. एसआईएस रिपोर्ट भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो सामाजिक रूप से न्यायसंगत और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भूमि अधिग्रहण सुनिश्चित करने में मदद करता है. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी गणेश कुमार ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के लिए एसआइएस रिपोर्ट का इंतजार है. इस अधिग्रहण के लिए राशि की स्वीकृति राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृत हो चुका है. रिपोर्ट मिलने के साथ ही, अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जायेगा.
रक्सौल एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में संशोधन
मिली जानकारी के अनुसार रक्सौल एयरपोर्ट के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान में संशोधन किया गया है. रक्सौल हवाई अड्डा के सामने से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को मोड़ने में असमर्थता के कारण ए-320 मॉडल के हवाई जहाज के उड़ान के लिए इसे उपर्युक्त पाया गया है. जानकार बताते है कि ए-320
आमतौर पर आरामदायक और सुरक्षित अनुभव होता है. एयरबस एक नैरो-बॉडी जेट विमान है जो शॉर्ट से मिड-हॉल (कम से मध्यम दूरी की) उड़ानों के लिए प्रयोग किया जाता है. यह दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले और भरोसेमंद विमानों में से एक है. इसके लिए 2000 से 2500 मीटर रन-वे की आवश्यकता होती है, रक्सौल में वर्तमान में 1500 मीटर लंबा रन-वे है, इसको पश्चिम तरफ बढ़ाने की योजना है, क्योकि पूरब में हाईवे के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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