Motihari: सुगौली में यूरिया की किल्लत से किसान परेशान, आवंटन के बावजूद दुकानों से खाद गायब
Updated at : 22 Sep 2025 4:39 PM (IST)
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कृषि विभाग और जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था तथा चरम पर पहुंचे भ्रष्टाचार के कारण प्रखंड में यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है.
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सुगौली . कृषि विभाग और जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था तथा चरम पर पहुंचे भ्रष्टाचार के कारण प्रखंड में यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है. हालात इतने गंभीर हैं कि किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं. दुकानदारों द्वारा हाथ खड़े कर दिए जाने से किसान बैरंग लौटने को मजबूर हैं. खासकर महिला किसानों को अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है, जो एक बोरी यूरिया लेने के लिए 100-150 रुपये किराया खर्च करने के बाद भी खाली हाथ लौट रही हैं. ईधर, सुगौली प्रखंड में सर्वाधिक युरिया का उठाव करने वाले दुकानदारों में शामिल प्रखंड के छपरा बहास स्थित जयसवाल खाद बीज भंडार से 500 रुपये में यूरिया बेचने का वीडियो ने जमीनी हकीकत की पोल खोल कर रख दिया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, डीएओ कार्यालय से सुगौली प्रखंड के लिए लगातार यूरिया खाद आवंटन का पत्र जारी किया गया. बावजूद इसके दुकानों में यूरिया नदारद है. जबकि, लगतार युरिया कालाबाज़ारी का मामला सामने आता रहा है. अब प्रखंड के छपरा बहास के इस दुकानदार ने भी आवंटन के बावजूद खाद नहीं मिलने की शिकायत वायरल कर दी है. चर्चा है कि विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है और किसानों को प्रति बोरी 266 रुपये की जगह 500 रुपये तक में यूरिया बेचा जा रहा है. इस किल्लत के कारण किसानों की फसल पर संकट गहराने लगा है. बीज, जुताई और मजदूरी पर भारी खर्च के बाद भी यूरिया न मिलने से पैदावार प्रभावित होती है. नतीजा यह होता है कि उपज और लागत लगभग बराबर हो जाती है. ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने का सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है. किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर भी कई कर्मी इस गोरखधंधे में संलिप्त हैं. वहीं बीएओ देवेन्द्र राय ने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को भी दी जाएगी.
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