रिश्तों में क्यों बढ़ रही दूरियां? पति-पत्नी के झगड़ों की नई वजह आई सामने

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Marital Dispute

AI जेनरेटेड फोटो

Marital Dispute: मोतिहारी के दारुल कज़ा का दावा है कि वैवाहिक विवादों के अधिकांश मामलों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और मायके का हस्तक्षेप बड़ी वजह बन रहे हैं. अब तक करीब 200 परिवारों को समझौते के जरिए टूटने से बचाया गया है.

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मोतिहारी से इन्तेजारुल हक की रिपोर्ट

Marital Dispute: मोतिहारी में पारिवारिक विवादों के मामलों में एक नया रुझान सामने आया है. शहर के हनुमानगढ़ी स्थित दारुल कज़ा का कहना है कि आजकल पति-पत्नी के बीच बढ़ रहे अधिकांश विवादों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और मायके का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप प्रमुख कारण बनकर उभर रहे हैं. दारुल कज़ा का दावा है कि समय रहते संवाद और समझाइश के जरिए अब तक करीब 200 परिवारों को टूटने से बचाया गया है.

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मोबाइल और संवाद की कमी बन रही विवाद की वजह

दारुल कज़ा के काज़ी एवं इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती रेयाज कासमी के अनुसार, स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग ने पति-पत्नी के बीच संवाद को प्रभावित किया है. उनका कहना है कि कई दंपति एक ही घर में रहते हुए भी एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं और सोशल मीडिया में अधिक व्यस्त रहते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि रोजी-रोटी के लिए घर से बाहर रहने वाले पति के दौरान कई मामलों में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग को लेकर संदेह और गलतफहमियां पैदा होती हैं, जिससे रिश्तों में तनाव बढ़ता है.

मायके के हस्तक्षेप को भी बताया कारण

मुफ्ती रेयाज कासमी का कहना है कि कई मामलों में पत्नी के छोटे-छोटे घरेलू निर्णयों में मायके का लगातार हस्तक्षेप भी विवाद को बढ़ाता है.

उनके अनुसार छोटी-छोटी बातों पर समझौता नहीं होना, अहंकार का टकराव और हर विवाद में बाहरी दखल रिश्तों को कमजोर कर देता है.

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दारुल कज़ा निभा रहा काउंसिलर की भूमिका

हनुमानगढ़ी स्थित दारुल कज़ा केवल धार्मिक मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक विवादों में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका भी निभा रहा है.

मुफ्ती रेयाज कासमी के अनुसार, दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनकी बातें सुनी जाती हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया से पैदा हुई गलतफहमियों को बातचीत के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाता है. साथ ही लड़की के माता-पिता को भी नए परिवार की निजी जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करने की सलाह दी जाती है.

दारूल कजा के मुफ्ती रेयाज कासमी, काउंसलर

तलाक को माना जाता है अंतिम विकल्प

दारुल कज़ा का कहना है कि हर मामले में पहले समझौते की कोशिश की जाती है और तलाक को अंतिम विकल्प माना जाता है.

मुफ्ती रेयाज कासमी के अनुसार, दारुल कज़ा में आने वाले करीब 70 प्रतिशत मामलों में विवाद की वजह बेहद सामान्य होती है, जिसे बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है.

200 परिवारों को टूटने से बचाने का दावा

मुफ्ती रेयाज कासमी ने बताया कि दारुल कज़ा अब तक करीब 200 परिवारों को टूटने से बचाने में सफल रहा है. उन्होंने कहा कि प्रतिदिन नए मामले आते हैं और दोनों पक्षों की सहमति से विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाता है.

उन्होंने लोगों से अपील की कि पति-पत्नी मोबाइल का संतुलित उपयोग करें, आपसी संवाद बनाए रखें और घर के छोटे-छोटे विवादों को परिवार के भीतर ही सुलझाने की कोशिश करें, ताकि रिश्तों में अनावश्यक दूरियां न बढ़ें.

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Aaruni Thakur

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