जिस आंगन से उठनी थी डोली, वहां से अर्थी पर हुई विदा… एक हादसे ने खत्म कर दिया सबकुछ

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दुल्हन बनने वाली थी स्नेहा, रोते-बिलखते परिवार ने दी...

जिस आंगन से उठनी थी डोली, वहां से अर्थी पर हुई विदा… एक हादसे ने खत्म कर दिया सबकुछ

नोएडा में ई-बाइक बैटरी ब्लास्ट हादसे का शिकार हुई मुजफ्फरपुर की स्नेहा श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम घर पहुंचा. जिस घर से कुछ महीनों बाद उसकी डोली उठनी थी, उसी आंगन से उसकी अंतिम यात्रा निकली. परिवार गहरे सदमे में है.

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Muzaffarpur News: नोएडा के सेक्टर-66 (मामूरा गांव) में ई-बाइक बैटरी ब्लास्ट हादसे में जान गंवाने वाली मुजफ्फरपुर की स्नेहा श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम जैसे ही शहर के चक्कर चौक स्थित घर पहुंचा, पूरे इलाके में मातम छा गया. जिस घर से कुछ महीनों बाद स्नेहा की डोली उठनी थी, उसी आंगन से उसकी अंतिम यात्रा निकली. परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है.

दिसंबर में होनी थी सगाई, शादी की तैयारियां शुरू थीं

परिजनों के मुताबिक, स्नेहा की शादी बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर से तय हुई थी. दिसंबर में दोनों की सगाई होनी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुट चुका था. पिता अश्विनी श्रीवास्तव और भाई अपूर्व बेटी के भविष्य को लेकर कई सपने संजोए हुए थे, जो इस हादसे के साथ टूट गए.

परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाली बेटी

साल 2021 में कोरोना काल के दौरान मां के निधन के बाद स्नेहा ने परिवार की जिम्मेदारियों में अहम भूमिका निभाई. चार बहनों में दूसरे स्थान पर रहने वाली स्नेहा ने मुरादाबाद से बीबीए की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद उसे नोएडा की एक निजी कंपनी में नौकरी मिली. परिवार के अनुसार, उसका सपना कॉर्पोरेट अनुभव हासिल कर आगे चलकर अपना बड़ा कारोबार शुरू करने का था.

बीमारी छिपाकर पिता को भेजा था संदेश

परिजनों ने बताया कि हादसे वाले दिन स्नेहा की तबीयत ठीक नहीं थी और वह कमरे से बाहर निकलने की स्थिति में भी नहीं थी. इसके बावजूद उसने अपने पिता को चिंता से बचाने के लिए संदेश भेजा कि वह ठीक है और ऑफिस के लिए निकल चुकी है. यह संदेश बाद में परिवार के लिए बेहद भावुक याद बन गया.

"अगर उस दिन ऑफिस चली गई होती..."

स्नेहा की बुआ ने बताया कि वह बेहद मेहनती और साहसी थी. पिता चाहते थे कि वह मुजफ्फरपुर में रहकर आगे की पढ़ाई करे, लेकिन स्नेहा अपने करियर को नई ऊंचाई देना चाहती थी. परिवार का कहना है कि यदि वह उस दिन रोज की तरह ऑफिस चली गई होती, तो शायद हादसे का शिकार नहीं होती.

नया कमरा लेने का सपना भी अधूरा रह गया

नोएडा में नौकरी शुरू किए स्नेहा को करीब ढाई महीने ही हुए थे. वह फिलहाल एक छोटे पीजी में रह रही थी. कुछ दिन पहले उसने पिता से कहा था कि वह जल्द ही बड़ा कमरा किराये पर लेने वाली है और चाहती थी कि पिता आकर उसे देखें. लेकिन उससे पहले ही हादसे ने परिवार से उनकी बेटी छीन ली. नोएडा में पोस्टमार्टम के बाद स्नेहा का पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस से पटना लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर पहुंचाया गया. अंतिम दर्शन के बाद सिकंदरपुर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया.

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