ePaper

Madhubani News : यम का दीप जला, प्रकाश का पर्व दीपावली आज

Updated at : 19 Oct 2025 10:12 PM (IST)
विज्ञापन
Madhubani News : यम का दीप जला, प्रकाश का पर्व दीपावली आज

दीपावली की तैयारी लोग कई दिनों से कर रहे हैं. दीपावली से एक दिन पूर्व यम का दीप जलाने की परंपरा रही है.

विज्ञापन

मधुबनी.

दीपावली की तैयारी लोग कई दिनों से कर रहे हैं. दीपावली से एक दिन पूर्व यम का दीप जलाने की परंपरा रही है. ऐसा माना जाता है कि यम का दीप जलाने से अकाल मृत्यु नहीं होती है. रविवार की शाम लोगों ने यम का दीप जलाया. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली मनाया जाता है.

इस बार दीपावली 20 अक्टूबर को मनायी जाएगी. दीपावली केवल बाहरी दीप प्रज्ज्वलित करने के लिए नहीं है, बल्कि यह आंतरिक चेतना को प्रकाशित करने का भी पर्व है. इसे रोशनी व दीपों का त्योहार माना जाता है. दीपावली के संबंध में कई कथा प्रचलित है. इसमें सबसे अधिक राम, लक्ष्मण सहित सीता के बनवास उपरांत अयोध्या लौटने की खुशी के रूप में मनायी जाती है. दीपावली पर्व के लिए रविवार को बाजार में काफी चाहत पल रही. लोगों ने जमकर पूजन सामग्री खरीदी.

दीपावली वैज्ञानिक दृष्टि से भी अहम

जब घी या तेल का दीप जलाते हैं तो तेल या घी में मौजूद फैटी एसिड जलते हैं. इस प्रक्रिया में फैटी एसिड का एक मॉलीक्यूल जलने से 56 कार्बन के मॉलीक्यूल निकलते हैं और 52 पानी के मॉलीक्यूल निकलते हैं. वहीं एक फैटीएसिड के मॉलीक्यूल को जलाने के लिए हवा में मौजूद ऑक्सीजन के 79 मॉलीक्यूल खर्च होते हैं. विज्ञान साफ तौर पर बताता है कि गर्म हवा हल्की होती है वो ऊपर चली जाती है और ठंडी हवा नीचे नीचे आती है. ऐसे में दीये से नकलने वाली आग के चलते हवा में मौजूद ऑक्सीजन दीये की लौ और तेजी से आती है. इसके चलते दीये के आसपास ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है. पं. पंकज झा शास्त्री ने कहा कि मिट्टी से बने दीप का ही उपयोग करना चाहिए, यह पृथ्वी का प्रतीक है. उसमें जलने वाला तेल और बाती भी जमीन से ही मिलती है. वहीं पृथ्वी के चारों ओर अंतरिक्ष है. ऐसे में दीए के चारों ओर अंतरिक्ष की कल्पना की गई है. वहीं दीए में अग्नि भी है. उसे जलने के लिए वायु भी चाहिए और तेल के जलने की प्रक्रिया में पानी के मॉलीक्यूल भी बनते हैं. ऐसे में एक दीया एक तरह से उन पंच तत्वों का प्रतीक माना गया है जिनसे दुनिया बनी है.

मानसून के बाद आती है दीपावाली

मानसून के दौरान हवा नम होती है और मानसून के बाद हमारे आसपास बैक्टीरिया भर जाती है. दीये से निकलने वाली गर्मी हवा को साफ करने में मदद करती है. दीया जलाने से कई ऐसे तत्व या केमिकल नहीं निकलता जिससे वातावरण को नुकसान पहुंचे. दीये की रोशनी बिजली पर निर्भर नहीं होती है. ऐसे में रोशनी के साथ ही किसी तरह के जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल नहीं करते. तेल में मौजूद मैग्नीशियम हवा में मौजूद सल्फर और कार्बन ऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया कर सल्फेट और कार्बोनेट बनाता है. भारी तत्व जमीन पर गिरते हैं, जिससे हवा हल्की हो जाती है.

लोगों ने खरीदी पूजन सामग्री

दीपावली पर्व पर लक्ष्मी व गणेश की पूजा का विशेष महत्व है. बाजार में मिट्टी से बनी मूर्ति से लेकर सोना चांदी व अन्य धातु की लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा की खरीदारी लोगों ने की. साथ ही जगह-जगह मां लक्ष्मी की चुनरी, पूजन सामग्री, नारियल, फल आदि की खरीदारी की जिससे बाजार में जाम सा नजारा था.

अकाल मृत्यु से बचने को जलाए जाते यम के दीप

दीपावली के एक दिन पहले यम के दीप जलाने की परंपरा रही है. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज के लिए दीया जलाया जाता है. जिसे यम का दीप कहते हैं. मान्यता है कि दीप जलाने से अकाल मृत्यु नहीं होती. कुछ लोग एक दीप जलाते हैं और कुछ 5 या 13 दीप जलाते हैं. यम के दीप नए दीप में नहीं बिल्कुल पुराने दिया में जलाया जाता है.

अमावस्या तिथि दिनके 3:08 से शुरू

इस बार 20 अक्टूवर सोमवार को दीपावली पर लक्ष्मी- गणेश एवं कुबेर पूजा मुहूर्त दिन के 4:19 से रात्रि 10:26 तक अति उत्तम होगा. उल्का भ्रमण रात्रि 7:17 तक. काली पूजा शुभ मुहूर्त – रात्रि निशिकाल 11:59 से रात्रि 1:27 तक. अमावस्या तिथि आरंभी 20 अक्टूवर दिन के 03:08 उपरांत अमावस्या तिथि समापन 21 अक्टूवर को 04:38 बजे तक होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GAJENDRA KUMAR

लेखक के बारे में

By GAJENDRA KUMAR

GAJENDRA KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन