मधुबनी: विश्व थायराइड दिवस आज, लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

प्रतीकात्मक तस्वीर
विश्व थायराइड दिवस 2026 पर चिकित्सकों ने थायराइड रोगों के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है. पढ़ें पूरी खबर…
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
Madhubani News: विश्व थायराइड दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम है, जो हर वर्ष 25 मई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य थायराइड रोगों, उनके लक्षणों, समय पर जांच और इलाज के प्रति लोगों को जागरूक करना है. साथ ही थायराइड बीमारियों के अध्ययन और उपचार में जुटे चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान को भी सम्मान देना है.
चिकित्सकों के अनुसार थायराइड रोग दुनिया के सबसे सामान्य अंतःस्रावी विकारों में शामिल हैं. भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की थायराइड समस्या से प्रभावित हैं.
क्या है इस वर्ष की थीम
विश्व स्वास्थ्य संगठन और चिकित्सा संस्थानों द्वारा वर्ष 2026 के लिए “लक्षणों की शुरुआत और समय पर निदान के बीच अंतर को कम करना” थीम निर्धारित की गई है.
वहीं इस वर्ष की पोषण थीम “थायराइड और पोषण” रखी गई है. इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि थकान, वजन बढ़ना या घटना, मूड स्विंग्स और कमजोरी जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार बेहद जरूरी है.
क्या है थायराइड
थायरॉयड ग्रंथि शरीर में थायराइड हार्मोन बनाती है, जो शरीर के सामान्य विकास, ऊर्जा संतुलन और मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी होता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि थायराइड की समस्या आसानी से पहचानी और नियंत्रित की जा सकती है, लेकिन समय पर इलाज नहीं होने पर इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं.
आयोडीन की कमी भी बड़ा कारण
चिकित्सकों के अनुसार आयोडीन थायराइड हार्मोन निर्माण का महत्वपूर्ण तत्व है. आयोडीन की कमी विशेषकर पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में अधिक देखी जाती है.
आयोडीन की कमी और अधिकता दोनों ही हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म का कारण बन सकती हैं.
थायराइड रोग के प्रमुख प्रकार
हाइपोथायरायडिज्म
इसमें शरीर में थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है. इससे थकान, वजन बढ़ना, कमजोरी और सुस्ती की समस्या होती है.
हाइपरथायरायडिज्म
इसमें थायराइड हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है. इसके कारण वजन कम होना, हाथ कांपना, तेज धड़कन और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
गण्डमाला (घेंघा)
यह थायरॉयड ग्रंथि के बढ़ने की स्थिति है, जो अक्सर आयोडीन की कमी से जुड़ी होती है.
हाशिमोटो थायरायडाइटिस
यह एक स्वप्रतिरक्षी रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करने लगती हैं.
थायराइड कैंसर
इसमें थायराइड ग्रंथि में कैंसर कोशिकाएं विकसित होने लगती हैं. हालांकि सभी थायराइड नोड्यूल कैंसर नहीं होते.
कैसे करें बचाव
चिकित्सकों ने थायराइड रोग से बचाव के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है.
बचाव के प्रमुख उपाय
- आयोडीन, सेलेनियम और लौह तत्व युक्त संतुलित आहार लें
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन से बचें
- तनाव कम रखें
- पर्याप्त और गहरी नींद लें
- नियमित व्यायाम करें
- विटामिन डी के लिए सुरक्षित धूप लें
- समय-समय पर थायराइड जांच कराएं
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच और समय पर इलाज से थायराइड रोगों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.
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