टीबी के कारण महिलाओं में बढ़ जाती है बांझपन की संभावना

जानकारी के अभाव में आमतौर पर लोगों को लगता है कि टीबी सिर्फ फेंफड़ों की बीमारी है. लेकिन ऐसा नहीं है. क्योंकि टीबी एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़ों से लेकर दिमाग और यूटरस में भी आसानी से हो सकती है.
सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा कि अगर लड़की शादी-शुदा है और पीरियड में किसी भी तरह की दिक्कत हो रही है या यौन संबंधों के समय बहुत ज्यादा दर्द हो रहा, वेजाइनल डिस्चार्ज भी ज्यादा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. किसी भी तरह के टीबी की शिकार महिलाओं के यूटरस में टीबी होने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. 5-10 प्रतिशत महिलाओं में हाइड्रो साल्पिंगिटिस की समस्या होती है. इससे फैलोपियन ट्यूब में पानी भर जाता है. यह भी इन्फर्टिलिटी की वजह बनता है. टीबी बैक्टीरिया मुख्य रूप से फैलोपियन ट्यूब को बंद कर देता है. इससे माहवारी नियमित नहीं होती है. महिला के पेट के निचले हिस्से में बहुत दर्द होता है और महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है.
लक्षण दिखने पर टीबी जांच आवश्यक
डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा है कि गर्भवती महिलाओं के टीबी संक्रमित होने के कई कारण हो सकते हैं. इसमें घर में टीबी के किसी अन्य व्यक्ति के लगातार संपर्क में आने, टीबी संक्रमित क्षेत्र में रहने, एचआईवी होने, कुपोषित व बहुत अधिक वजन कम होने, शराब व मादक पदार्थ जैसे सिगरेट, गुटखा सेवन शामिल है. टीबी के कुछ ऐसे लक्षण आमतौर पर जाहिर होते हैं. जिसके लिए टीबी जांच आवश्यक है. इसमें एक सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना, तेज बुखार रहना, भूख की कमी, बहुत अधिक थकान तथा लंबे समय तक अस्वस्थ रहना, बलगम में खून आना तथा गर्दन की ग्रंथियों में सूजन व दर्द रहना शामिल है. ट्यूबरकूलीन स्किन टेस्ट तथा टीबी ब्लड टेस्ट दोनों सुरक्षितसेंटर फार डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए टीबी खतरनाक है. गर्भावस्था में टीबी का इलाज जटिल होता है. लेकिन इसका इलाज नहीं किये जाने पर यह गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक होता है. गर्भावस्था में ट्यूबरकूलीन स्किन टेस्ट व टीबी ब्लड टेस्ट दोनों सुरक्षित हैं. इसके अलावे बलगम की जांच और फेफड़े का एक्सरे किया जाता है. गर्भवती महिलाओं में टीबी का सही समय पर पता चल जाने से इलाज संभव है. गर्भवतियों के टीबी का इलाज नहीं होने से शिशु भी टीबी रोग से संक्रमित हो सकते है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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