PM Modi Bihar Visit : मधुबनी एयरपोर्ट के नये टर्मिनल का आज पीएम मोदी करेंगे शिलान्यास, पहली बार यहां से उड़ेंगे आम लोग

madhubani airport
PM Modi Bihar Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मधुबनी एयरपोर्ट के नये टर्मिनल का शिलान्यास से बड़ी आबादी को फायदा होगा. लोगों को कोलकाता, पटना, रांची आदि जगहों के लिए यहां से पहली बार उड़ान सेवा उपलब्ध करायी जायेगी. एयर एम्बुलेंस सेवा की भी यहां से शुरुआत होगी, जिससे मरीजों को लाभ होगा. संभावना है कि इसी साल यहां से विमान उड़ान भरने लगेगी.
PM Modi Bihar Visit : मधुबनी. दूसरे विश्वयुद्ध के समय बने मधुबनी एयरपोर्ट के नये टर्मिनल का गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास करेंगे. अब तक यहां से चार्टर विमानों की आवाजाही ही होती रही है. मधुबनी एयरपोर्ट से अब तक कमर्शियल उड़ानों का कोई इतिहास नहीं है. यह हवाई अड्डा पहली बार व्यावसायिक उड़ानों के लिए खोलाा जा रहा है. 1941 के आसपास दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह ने इस एयरपोर्ट का निर्माण कराया था. 1982 में अंतिम बार यहां बिहार सरकार का हवाई जहाज उतरा था. पिछले चार दशक से यह एयरपोर्ट जानवरों का चारागाह बना हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उड़ान योजना के तहत इस एयरपोर्ट को आम लोगों के लिए खोला जा रहा है. इस एयरपोर्ट के खुलने से एक बड़ी आबादी को फायदा होगा.
कई शहरों के लिए यहां से उड़ेंगे छोटे विमान
उड़ान योजना के तहत बिहार के सीमावर्ती मधुबनी एयरपोर्ट से छोटे विमानों के उड़ान भरने से लोगों को समय की बचत होगी. लोगों को यहां से कोलकाता, रांची, पटना आदि जगहों के लिए जल्द उड़ान सेवा चालू होने का इंतजार है. एयरपोर्ट चालू होने पर एयर एम्बुलेंस सेवा का भी मरीजों को फायदा मिल सकेगा. मधुबनी हवाई अड्डे के रनवे की लंबाई छोटे विमानों के लिए प्रयाप्त है. रेनवे की स्थिति भी बेहतर है और थोड़ी मरम्मत के बाद यहां से हवाई जहाज की आवाजाही शुरू की जा सकती है. यहां एक साथ कई छोटे प्लेन लैंड कर सकते हैं. बसुआड़ा और निधि चौक की तरफ से एयरपोर्ट की कनेक्टिविटि है. वर्षो से लोग यहां से विमानों के उड़ान भरने की उम्मीद लगाये बैठे लोगों में खुशी का महौल है.
पहले राजा, फिर नेताओं के लिए इस्तेमाल होता रहा
1941 में बने मधुबनी हवाई अड्डे की जिम्मेदारी आजकल एयरपोर्ट ऑथिरिटी आफ इंडिया के पास है. 1963 तक यह एयरपोर्ट दरभंगा राज का निजी एयरपोर्ट रहा. उसके बाद भारत सरकार को यह एयरपोर्ट सौंप दिया गया. इस एयरपोर्ट पर सेना और सरकार के विमानों की ही आवाजाही होती रही. 1982 में अंतिम बार यहां बिहार सरकार का सरकारी विमान उतरा था. उसके बाद यह एयरपोर्ट लगभग बंद और वीरान ही है. यह हवाई अड्डा केवल राजनेताओं के लिए रैली के दौरान हेलीकॉप्टर उतारने के लिए उपयोग किया जाता रहा है. बाकी समय, यह स्थानीय निवासियों के लिए एक खुला मैदान रहा है, जो इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए करते हैं. जब कभी किसी नेता को मधुबनी आना होता है, उस समय इस जगह की सफाई कर इसे हेलीकॉप्टर के लैंड करने लायक और रैली की सभा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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