ePaper

Madhubani News : राजा भोज की नगरी भोजपंडोल में विराजमान हैं मां ब्रह्मचारिणी, भक्तों की सभी मुरादें करती हैं पूरी

Updated at : 26 Sep 2025 10:56 PM (IST)
विज्ञापन
Madhubani News : राजा भोज की नगरी भोजपंडोल में विराजमान हैं मां ब्रह्मचारिणी, भक्तों की सभी मुरादें करती हैं पूरी

मिथिलांचल के कण-कण में देवी देवताओं का निवास है. ऐसा ही एक आधत्यमिक स्थल है, प्रखंड क्षेत्र के भोजपंडोल गांव में स्थित मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर.

विज्ञापन

बिस्फी. मिथिलांचल के कण-कण में देवी देवताओं का निवास है. ऐसा ही एक आधत्यमिक स्थल है, प्रखंड क्षेत्र के भोजपंडोल गांव में स्थित मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर. जहां माता रानी का लीला अपरंपार है. जनश्रुति के अनुसार भोजपंडोल गांव कभी विक्रमादित्य अर्थात राजा भोज की नगरी हुआ करता था. इस गांव की चौहद्दी भी अपने आप में खास है. पूरब दिशा में घोरसाईर अर्थात अश्वशाला घोड़े के रहने का स्थान व गजबा हाथियों के रहने का स्थान पश्चिम में सिसई टोल, उत्तर में सलमपुर और दक्षिण में हनुमान नगर स्थित है. राजा भोज की नगरी भोजपंडोल सिद्धपीठ स्थान में सुमार है. यहां विराजमान मां ब्रह्मचारिणी भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती हैं. कहा जाता है कि यहां जो भी भक्त पहुंचते है, उसकी हर मनोकामनाएं माता ब्रह्मचारिणी पूर्ण करती है. इस स्थान के पुरोहित पंडित सुबोध मिश्र की मानें तो यहां विक्रम संवत 2082 वर्ष से पूजा होते आ रहा है. प्रेमसागर तालाब के समीप स्थित यह स्थान वर्षो पूर्व डीहवार स्थान के नाम से प्रसिद्ध हुआ करता था. जहां घने जंगल हुआ करते थे. इस स्थान पर मात्र एक विशाल पीपल व वटवृक्ष हुआ करता था. एक समय की बात है, ग्रामीण शिव नारायण झा व बंगाली झा को स्वयं जगत जननी ने स्वप्न में आकर कहा कि मुझे पीपल की खोह से निकालो. फिर क्या था दोनों कुरहर और टेंगारी लेकर स्थान पर पहुंच वहां विशाल पीपल वृक्ष को काटने के लिए निकल पड़े. उन्हें देख अन्य ग्रामीण भी हाथो में कुरहर और टेंगारी लेकर स्थान पर पहुंच गए. वृक्ष काटने के बाद मुसक पर सवार गणपति गणेश, बसहा पर गौरीशंकर, सात अश्व के संग भगवान भास्कर और ब्रम्हाणी रूप में मां जगदम्बा की प्रतिमा निकलीं. जहां तत्काल जाफरी से घेर खुले आसमान के नीचे प्रतिमा को स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू की गई. यह सिलसिला करीब पांच से छह वर्ष तक चला. फिर वर्ष 1985-86 में ग्रामीणों के सहयोग से 40 हजार रूपये आर्थिक सहयोग से मंदिर सहित परिसर का निर्माण कराया गया. जिसमें सभी देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया. उस समय से अबतक उसी मंदिर में सभी देवी देवता स्थापित हैं. वर्ष 2025 में मंदिर के छत क्षतिग्रस्त होने के कारण तोड़कर नए सिरे से बनवाया जा रहा है. बता दें कि आज भी दो विशाल वृक्ष में वटवृक्ष उक्त स्थान पर है. लगभग 45 वर्ष से पंडित सुबोध मिश्र पुरोहित हैं. दुर्भाग्य है कि राजा भोज की नगरी का यह आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल आज भी विकास से कोसो दूर है. इस स्थान के विकास की दिशा में स्थानीय विधायक, एमएलसी, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि के अलावे अधिकारी भी पहल करना उचित नहीं समझ रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GAJENDRA KUMAR

लेखक के बारे में

By GAJENDRA KUMAR

GAJENDRA KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन