Madhubani News : प्रभु श्रीराम ने तोड़ा धनुष, श्रदालुओं ने की पुष्पवर्षा

पड़ोसी देश नेपाल के जनकपुर धाम में विवाह पंचमी महा महोत्सव के तीसरे दिन रंग भूमि मैदान (बारहविघा) में धनुष यज्ञ कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ हुआ.
हरलाखी. पड़ोसी देश नेपाल के जनकपुर धाम में विवाह पंचमी महा महोत्सव के तीसरे दिन रंग भूमि मैदान (बारहविघा) में धनुष यज्ञ कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ हुआ. इस अवसर पर प्रभु श्रीराम ने धनुष भंग किया तो जनकपुर वासियों ने पुष्पवर्षा की. जयपुर से आए रामलीला कलाकारों ने धनुष यज्ञ कार्यक्रम का अनोखा मंचन किया. कार्यक्रम में राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंबर में भाग लेने के लिए देश-विदेश के कोने-कोने से राजा आए थे. उसी समय गुरु विश्वामित्र श्रीराम लक्ष्मण के साथ धनुष यज्ञ सभा में भाग लेते हैं. जहां रावण सहित बड़े-बड़े शूरवीर मौजूद होते हैं. इस दौरान राजा जनक ने घोषणा किया कि जो भी राजा शिव धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, सीता जी का विवाह उसी के साथ होगा. राजा जनक के घोषणा के अनुसार लंकापति रावण सहित बड़े-बड़े राजाओं ने धनुष उठाने की खूब जोर आजमाइश की. लेकिन प्रत्यंचा चढ़ाने की बात तो दूर रही, कोई धनुष को तिल भर हिला भी नही सका. एक-एक कर सारे राजा हताश होकर सिर झुका कर बैठ गए. इस पर राजा जनक बोले यदि उन्हें मालूम होता कि यह धरती वीरों से खाली है, तो वह ऐसी प्रतिज्ञा कभी न करते. इतना सुनते ही लक्ष्मण जी क्रोध में लाल हो गए. लक्ष्मण ने कहा कि रघुवंशी के रहते राजा जनक को ऐसी अनुचित बात नहीं बोलना चाहिए. यदि गुरुजी का आदेश मिल जाए तो यह धनुष क्या चीज है, मैं पूरे ब्रह्मांड को गेंद की तरह उठाकर दौड़ सकता हुं, और कच्चे घड़े की तरह फोड़ भी सकता हूं. इधर पिता को मायूस देख जानकी जी चिंतित हो जाती है. एक पल के लिए वह भी मान लेती है कि शायद अब मेरा विवाह प्रभु श्रीराम से नहीं हो सकता और वह मन ही मन गिरिजा माई को याद करती है. वहीं जब भगवान श्रीराम ने जानकी जी को बहुत ही विकल देखा. उनका एक-एक क्षण कल्प के समान बीत रहा था. मानों यदि प्यासा आदमी पानी के बिना शरीर छोड़ दे, तो उसके मर जाने पर अमृत का तालाब किस काम का. सारी खेतों का फसल सूख जाने पर वर्षा किस काम की. समय बीत जाने पर फिर पछताने से क्या लाभ. मन ही मन सोच समझकर श्रीरामजी ने जानकीजी की ओर देखा और उनका विशेष प्रेम देख वह पुलकित हो गए. फिर बिना कोई विलंब किए भगवान ने गुरु को प्रणाम किये. इसके बाद भगवान राम को गुरु विश्वामित्र ने धनुष भंग करने का आदेश दिया. इस पर भगवान श्रीराम ने अपने आराध्य शिव का ध्यान कर बड़ी फुर्ती से धनुष को फुल की तरह उठा लिया और एक क्षण में श्रीरामजी ने धनुष को तोड़ डाला. धुनष टूटते ही जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया. जनकपुर वासियों ने श्रीराम व किशोरी जी पर पुष्पवर्षा की. सभी श्री रामचंद्र की जय”””” बोलने लगे. फिर प्रभु ने धनुष के दोनों टुकड़े को पृथ्वी पर रख दिये. यह देखकर जानकी जी प्रसन्न हुई. सभी श्रद्धालुओं ने प्रभु की प्रशंसा की. इस अवसर पर आयोजित धनुष यज्ञ कार्यक्रम को देख रहे सभी दर्शक प्रसन्न होकर अपने-अपने जगहों पर नाचने झूमने लगे. सब कहते दिखे कि श्री रामचंद्र ने शिवजी के धनुष को तोड़ डाला. इसके बाद प्रभु श्रीराम व जानकी जी ने एक दूसरे को जयमाला पहनाई. महिलाओं ने मंगलगीत गाते हुए श्रीराम जानकी जी पर पुष्पवर्षा की. मानों एक बार फिर जनकपुरधाम में त्रेतायुग आ गया हो. सब ने प्रभु श्रीराम व माता जानकी का दर्शन की. वहीं दर्शकों ने तालियां बजाकर रामलीला के सभी कलाकारों को धनुष यज्ञ मंचन कार्यक्रम का सराहना की. मौके पर जानकी मंदिर के महंत जनक के भूमिका निभाई. धनुषा जिला सहित नेपाल के कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया.
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