Madhubani News : तीसरे दिन भी जारी रही चिकित्सकों की हड़ताल, तीन दिन में करीब 1500 मरीज हुए इलाज से वंचित

Edited by GAJENDRA KUMAR
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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का ओपीडी कार्य बहिष्कार शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा.

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मधुबनी.

जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का ओपीडी कार्य बहिष्कार शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. इसके कारण पिछले तीन दिनों में ओपीडी में आने वाले लगभग 1500 से अधिक मरीज इलाज से वंचित रहे. खामियाजा जिले के दूर दराज के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भुगतना पर रहा है. सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल से लेकर प्रखंड स्तर पर संचालित पीएचसी एवं सीएचसी तक ओपीडी कार्य बहिष्कार के कारण सैकड़ों मरीजों को स्वास्थ्य सेवा से वंचित रहना पड़ा. हालांकि सिविल सर्जन द्वारा चिकित्सकों से कार्य बहिष्कार को समाप्त करने का आग्रह किया गया.

चिकित्सक हड़ताल पर ओपीडी में नहीं पहुंचे मरीज :

डॉक्टर के ओपीडी कार्य बहिष्कार के तीसरे दिन ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या काफी कम रही. कार्य बहिष्कार के कारण तीसरे दिन भी सिविल सर्जन डाॅ हरेंद्र कुमार ने सदर अस्पताल का जायजा लिया. सीएस ने ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सदर अस्पताल के इमरजेंसी में चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश चिकित्सकों को दिय. सीएस ने इमरजेंसी, एसएनसीयू, प्रसव कक्ष एवं भर्ती वार्डों का निरीक्षण कर मरीजों से फीडबैक लिया. चिकित्सकों के हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. भासा के जिला सचिव डॉ कुणाल कौशल ने बताया कि भासा की बैठक में निर्णय के आलोक में 27, 28 एवं 29 मार्च तक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया था. डाॅ. कुणाल कौशल ने कहा कि रविवार एवं सोमवार को सरकारी अवकाश के कारण अस्पताल में छुट्टी रहेगी. शनिवार को भासा के पदाधिकारियों की बैठक कर अगली रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा. सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार ने चिकित्सकों से कार्य बहिष्कार को वापस लेने लेने का अनुरोध किया है. ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके. सीएस ने कहा कि चिकित्सकों द्वारा आहूत कार्य बहिष्कार के संबंध में उपसचिव स्वास्थ्य को पत्र देकर उचित मार्गदर्शन की माग की है.

मांगें पूरी नहीं होने पर दी चेतवानी:

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के जिला सचिव डॉ कुणाल कौशल ने दर्जनों चिकित्सकों के हस्ताक्षर युक्त 6 सूत्री मांगों का ज्ञापन डीएम अरविंद कुमार वर्मा को सौंपा है. चिकित्सकों की मांगों के संबंध में डा. कौशल ने कहा कि चिकित्सा सेवा एक आकस्मिक सेवा है. इस सेवा में कार्य करने वाले चिकित्सकों के कार्य अवधि का निर्णय अब तक नहीं हो सका है. बायोमेट्रिक उपस्थिति की समय सीमा पालन करने पर कई कार्य नहीं हो सकेगा. चिकित्सा जैसी आकस्मिक सेवा होने के बावजूद विभाग में पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को आवासीय सुविधा अस्पताल परिसर में उपलब्ध नहीं है. इसके कारण बायोमेट्रिक उपस्थिति की समय सीमा का पालन करने में काफी कठिनाई होगी. डॉक्टर कौशल ने कह कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति में कुछ दिन ही शेष बचा है. चिकित्सकों का वेतन रोक दिया गया है. जिला पदाधिकारी से वेतन निकासी की अनुमति देने की मांग की है.

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