Madhubani News : अब मोबाइल मेडिकल टीमों में आयुष चिकित्सक संभालेंगे कमान, बच्चों की सेहत पर रहेगी नजर
Updated at : 24 Jan 2026 10:20 PM (IST)
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जिला स्तर पर प्रतिदिन 2,500 बच्चों की होगी स्क्रीनिंग.
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जिला स्तर पर प्रतिदिन 2,500 बच्चों की होगी स्क्रीनिंग.
Madhubani News : मधुबनी.
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. अब इस कार्यक्रम के तहत गठित होने वाली मोबाइल मेडिकल टीमों में नवचयनित आयुष चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा. इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना है.जिला स्तर पर प्रतिदिन 2,500 बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य
नये निर्देशों के अनुसार, मधुबनी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को रफ्तार देने के लिए व्यापक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में जिले में 25 मोबाइल मेडिकल टीमें सक्रिय हैं. प्रत्येक टीम को प्रतिदिन कम से कम 100 बच्चों की स्क्रीनिंग करने का जिम्मा सौंपा गया है. इस प्रकार, जिले में हर दिन कुल 2,500 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी. राज्य स्तर पर इस अभियान के माध्यम से हर महीने लगभग 5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है.डिजिटल होगा रिकॉर्ड, बनेगा हेल्थ कार्ड
जांच के दौरान प्रत्येक बच्चे का एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाएगा. बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं और आंकड़ों को अनिवार्य रूप से आरबीएसके के वेब पोर्टल पर प्रविष्ट किया जाएगा. यदि जांच के दौरान कोई बच्चा किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित पाया जाता है, तो उसे तुरंत उच्च केंद्रों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में रेफर किया जाएगा। वहां बच्चों के मुफ्त उपचार और फॉलोअप की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.सिविल सर्जन और प्रशासन की मुस्तैदी
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि आयुष चिकित्सकों के जुड़ने से बच्चों की स्क्रीनिंग और रेफरल की प्रक्रिया में अधिक सहजता आएगी. उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल तक पहुंचना है, ताकि किसी भी बीमारी का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाकर उसका समय पर इलाज किया जा सके. राज्य स्वास्थ्य समिति ने सिविल सर्जनों को यह भी निर्देश दिया है कि टीमों के गठन में मानकों का पूर्ण पालन किया जाए और हर महीने की 5 तारीख तक मासिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) पोर्टल पर अपलोड किया जाए. इसके साथ ही ये टीमें बाल हृदय योजना और बाल श्रवण योजना के सफल क्रियान्वयन में भी जिला समन्वयक का सहयोग करेंगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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