Madhubani News : अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाह की रोकथाम के लिए चलाया जा रहा अभियान

Edited by GAJENDRA KUMAR
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अक्षय तृतीया पर 30 अप्रैल को होने वाले सामूहिक विवाह, जिसमें बाल विवाह होने की संभावना अधिक होती है.

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मधुबनी.

अक्षय तृतीया पर 30 अप्रैल को होने वाले सामूहिक विवाह, जिसमें बाल विवाह होने की संभावना अधिक होती है. उसकी रोकथाम के लिये विशेष जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही है. प्रशासन की टीमें भी अलर्ट है.

बाल विवाह की रोकथाम के लिए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत व्यापक कार्य योजना बनायी गयी है. विवाह के लिए लड़की की शादी की उम्र 18 वर्ष व लड़के की शादी की उम्र 21 वर्ष निर्धारित है. इससे पूर्व विवाह करना कानूनन अपराध है. नियम के तहत बाल विवाह के आयोजन में भागीदार सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई किए जाने का भी प्रावधान है, जिसके तहत 2 साल की जेल व एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है. बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है. महिला हेल्पलाइन नंबर 181 एवं चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. माना जाता है कि देश के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह ज्यादा होते हैं, लेकिन शहरों में भी बाल विवाह कम नहीं होते. बाल विवाह एनीमिया समेत कई बीमारियों का कारण बनता है. बचपन में हुए विवाह और उसके बाद विधवा हो जाने के दंश को हमारी बच्चियां सदियों से झेलती आयी हैं.

बाल विवाह कराने एवं शामिल लोगों पर होगी कार्रवाई

बाल विवाह करवाने वाले पुजारी, नाई, गांव के पंच, सरपंच, शादी में शामिल लोग व शहरों में नगर पार्षदों एवं सामुदायिक केंद्र, सार्वजनिक भवन, मैरिज पैलेस, धर्मशाला इत्यादि के मालिक/प्रभारियों कार्ड प्रिंटिंग, फोटोग्राफर, बैंड बाजा व टेंट हाउस के संचालकों सहित जिला की सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.

बाल विवाह रोकथाम के लिए बनायी गयी है विशेष रणनीति

राज्य सरकार बाल विवाह रोकथाम के लिये विशेष रणनीति तय की है. बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल की. यह एक ऐसा अभिनव ऑनलाइन प्लेटफार्म है जो नागरिकों को बाल विवाह की घटनाओं की रिपोर्ट करने, शिकायत दर्ज करने और देश भर में बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है.

लड़कियां शिक्षित होंगी तो समझेगी हित और नुकसान

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए बच्चियों में शिक्षा का प्रसार बहुत जरूरी है. लड़कियां शिक्षित होंगी तो अपना हित और नुकसान समझ पाएंगी. युवा लडिक़यों को सशक्त बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है. इसमें न केवल सरकारी तंत्र बल्कि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि बाल विवाह को रोका जा सके.

क्या कहते हैं अधिकारी

महिला एवं बाल विकास निगम के जिला प्रबंधक हेमंत कुमार ने कहा कि कम उम्र में शादी होने पर लड़कियां बीमारी से ग्रसित रहती है. कम उम्र में ही अधिक उम्र की दिखने लगतीं हैं. उनका औसत आयु भी घट जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रदान करना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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