मिथिला पेंटिंग कलाकारों ने कैनवास पर दिया ऑपरेशन सिंदूर को रंग

Edited by DIGVIJAY SINGH
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मिथिला पेंटिंग अब पारंपरिक कलाकृति रास, कोहबर, अष्टदल से बाहर निकल कर देश-विदेश के प्रमुख घटना क्रम के थीम पर अपनी छाप देने लगी है.

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-पहलगाम घटना, ऑपरेशन सिंदूर को तीन कलाकारों ने पेंटिंग में उकेरा -सात दिन तक मेहनत से बनायी पेंटिग संग्रहालय के लिए डीएम को सौंपी मधुबनी. मिथिला पेंटिंग अब पारंपरिक कलाकृति रास, कोहबर, अष्टदल से बाहर निकल कर देश-विदेश के प्रमुख घटना क्रम के थीम पर अपनी छाप देने लगी है. मधुबनी पेंटिंग से जुड़े कलाकार अब अपने पौराणिक पारंपरिक थीम के अलावे नए-नए थीम पर मिथिला चित्रकला को उकेर कर चर्चित हो रहे हैं. इससे मिथिला चित्रकला का और विस्तार हो रहा है. मधुबनी के तीन कलाकारों ने पिछले माह पहलगाम में आतंकी घटना के बाद भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के आतंकवादियों के विरुद्ध चलाये गए ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर पेंटिंग बनायी है. कलाकारों के बनाये चित्र की काफी सराहना की जा रही है. लोकहित रंगपीठ के सचिव की परिकल्पना को किया साकार लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान मधुबनी के कलाकारों ने पहलगाम आतंकवादी घटना को जनभावनाओं से जोड़कर मिथिला चित्रकला के माध्यम से चित्रकारी की है. सिंदूर थीम पर चित्रकारी की परिकल्पना लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान के सचिव डॉ. महेंद्र लाल कर्ण की है. इसकी डिजाइन संस्था के कला प्रशिक्षक नितिन राउत ने तैयार किया है. संस्था ने सरहद शाहपुर पंडौल में संचालित मिथिला चित्रकला की प्रशिक्षक रूपा कुमारी, करण कुमार एवं डिजाइनर नितिन राउत ने मिलकर कलाकारी को सूझबूझ से तैयार किया है. तीन भाग में बांटकर छह ब्लॉक में किया तैयार डॉ. महेंद्र लाल कर्ण बताते हैं कि छह गुणे चार फुट के कैनवास पर ऑपरेशन सिंदूर की थीम को उकेरा गया है. चित्रकारी में कैनवास के दो फुट के तीन बराबर भागों में बांटकर कुल 6 ब्लॉक में थीम को दर्शाया गया है. कैनवास के मध्य भाग में रणचंडी (काली) को दर्शाया गया है. जिनके माथे पर सिंदूर लगाने के स्थान पर मिसाइल को दर्शाया गया है. इस चित्र के ठीक नीचे के ब्लॉक में ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाली भारतीय सेना की कर्नल सोफिया के साथ वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते दिखाया गया है. इसके नीचे क्रांतिवीर जवानों को अपने पर परिवार से रण क्षेत्र के लिये विदा करती मां, बहन, पत्नी एवं समाज को दर्शाया गया है. मध्य भाग के ऊपर देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को दर्शाया गया है. वापस लौट रहे पाकिस्तानियों को भी दी जगह कैनवास के बायीं ओर के ब्लॉक में वीजा पर भारत आए पाकिस्तानी नागरिकों को वापस पाकिस्तान जाते बॉर्डर के दृश्य को दर्शाया गया है. चित्र में नीचे सिंधु नदी के जल रोकने को दिखाया गया है. कैनवास के दाहिनी और नीचे सिंधु नदी के पानी को रोकने से पाकिस्तान में पीने के पानी की किल्लत को दर्शाया गया है. इससे ऊपर जवानों के मिसाइल अटैक से पाकिस्तान में हुई तबाही को दर्शाया गया है. डॉ कर्ण ने बताया कि सात दिन में कलाकार प्रतिदिन 10 से 11 घंटे कार्य कर चित्रांकन कर इसे बनाया है. बाजार में दो लाख है कीमत डॉ. कर्ण और डिजाइनर नितिन राउत बताते हैं कि जिस प्रकार से यह पेंटिंग बनी है, उसका वर्तमान में बाजार मूल्य कम से कम दो लाख तक होना चाहिए. यह ऐतिहासिक कलाकृति है. इसे संग्रहालय में देने से कलाकारों का नाम व कला जीवंत हो जायेगी. सालों साल तक इनकी कलाकारी को याद रखा जायेगा. इस कारण इस कला को डीएम के माध्यम से संग्रहालय में रखने का निवेदन किया गया है.

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