फसल क्षति का झुनझुना

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मधुबनीः जिले के किसानों को फसल क्षति का मुआवजा विगत कई वर्षो से नहीं दिया जा रहा है. एक ओर सरकार किसानों के हित के लिए कई प्रकार की योजना संचालित कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है. तो दूसरी तरफ किसानों क फसल क्षति का कोई मुआवजा नहीं देकर […]

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मधुबनीः जिले के किसानों को फसल क्षति का मुआवजा विगत कई वर्षो से नहीं दिया जा रहा है. एक ओर सरकार किसानों के हित के लिए कई प्रकार की योजना संचालित कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है. तो दूसरी तरफ किसानों क फसल क्षति का कोई मुआवजा नहीं देकर किसानों के साथ सौतेलापन का व्यवहार हो रहा है. आपदा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 08-09 बाद अब तक एक भी रुपये फसल क्षति मद में किसानों को नहीं दे सकी है. दस कारण किसानों में निराशा एवं आक्रोश व्याप्त है.

फसल क्षति मुआवजे को लेकर जिले के सैकड़ों किसान के आवेदन अब तक लंबित है. इसके विरुद्ध में विभाग ने मुआवजा का भुगतान नहीं किया है. विगत अक्तूबर नवंबर माह में फैलिन चक्रवात के कारण सैकड़ों एकड़ में लगी फसल नष्ट हो गया. इसके लिए सैकड़ों किसानों ने फसल क्षति के मुआवजा के लिए आपदा विभाग के पास आवेदन दिया. विभाग ने अपने स्तर से डीएम के निर्देश पर क्षति का आंकलन कर विभाग को 15 लाख 73 हजार 883 रुपये आवंटन देने की मांग की. लेकिन अब तक एक रुपये भी विभाग को इस मद में नहीं आया है.

विगत वर्ष 10-11 में बेनीपट्टी अनुमंडल में बाढ़ के कारण हजारों एकड़ में लगा धान का फसल बरबाद हो गया. लेकिन अब तक उस क्षति का भी भुगतान विभाग ने नहीं किया है. विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बेनीपट्टी अनुमंडल में आये बाढ़ के कारण मधवापुर प्रखंड में 6393 हेक्टेयर में लगा धान का फसल बरबाद हो गया था. जबकि बेनीपट्टी में 8210 हेक्टेयर बिस्फी में 4986 हेक्टेयर, हरलाखी में 7551 हेक्टेयर, मधेपुर में 3036 हेक्टेयर में लगा धान का फसल नष्ट हो गया था. इसके लिए आपदा विभाग द्वारा सरकार को आवंटन भेजने का प्रस्ताव दिया गया. लेकिन अब तक वह आवंटन नहीं प्राप्त हो सका. जिस प्रकार का रवैया सरकार ने फसल क्षति को लेकर विगत कई वर्षो से अपना रखी है. उसे देख कर किसानों में इस वर्ष सुखाड़ के बाद भी अनुदान नहीं मिलने की चर्चा जोरों पर है. हालांकि विभाग भी सुखाड़ में अनुदान दिये जाने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार पर दबाव बनाये हुए है. बावजूद इसके फसल क्षति की राशि दिये जाने की संभावना कम है.

विगत दिनों जिले में सुखाड़ की स्थिति का जायजा लेने केंद्र सरकार ने चार सदस्यीय टीम को मधुबनी भेजा था. टीम ने राजनगर, पंडौल सहित विभिन्न क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा भी लिया तथा हर संभव मदद किये जाने का आश्वासन दिया. लेकिन अब तक वह आश्वासन हकीकत का रूप नहीं ले सका है. इस बाबत जिला आपदा प्रभारी पदाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता ने बताया है कि सरकार के पास जिले के स्थिति की रिपोर्ट बना कर हर वर्ष भेजी जाती है. लेकिन अब तक फसल क्षति मद में राशि नहीं प्राप्त हो सका है.

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