शहर में सैर-सपाटे की जगह नहीं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कहां बिताएं सुकून के दो पल . कूड़ेदान में तब्दील हुआ शिशु पार्क, बंद हो गये दो सिनेमा हॉल मधुबनी : शहर में मनोरंजन के लिए लोग तरस रहे हैं. मनोरंजन के अभाव में लोगों में तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ता जा रहा है. शहरवासियों को कोई ऐसा पार्क या स्थल नहीं मिल रहा है जहां […]
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कहां बिताएं सुकून के दो पल . कूड़ेदान में तब्दील हुआ शिशु पार्क, बंद हो गये दो सिनेमा हॉल
मधुबनी : शहर में मनोरंजन के लिए लोग तरस रहे हैं. मनोरंजन के अभाव में लोगों में तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ता जा रहा है. शहरवासियों को कोई ऐसा पार्क या स्थल नहीं मिल रहा है जहां वे दो पल चैन की सांस ले सकें. शहर में भवन निर्माण की मची होड़ के बीच लोगों का प्रकृति और हरियाली से रिश्ता टूटता जा रहा है. कई लोग वृक्षों को काटकर अपनी जमीन पर मकान बनाने की होड़ में शामिल हो गये हैं.
ध्वस्त हुआ ऐतिहासिक पार्क
शहर का ऐतिहासिक शिशु पार्क ध्वस्त हो गया है. पार्क में वृक्ष नजर नहीं आते. बच्चों के लिए बनाया गया झूला और बैठने के लिए सीमेंट से बना बैंच भी क्षतिग्रस्त हो चुका है. आसपास के दुकानदार और कॉलोनी के लोग इसमें कूड़ा कचड़ा फेंकने का काम कर रहे हैं. गंदगी से शिशु पार्क का अस्तित्व समाप्त हो गया है. इसकी देखरेख नहीं होती है. यह शिशु पार्क प्रसिद्ध काली मंदिर के समीप अवस्थित है. पिछले 30 साल में इस पार्क की सुधि नहीं ली गयी है.
नहीं बन सका पार्क
शहर के नीलम चौक के समीप पार्क व उद्यान बनाने की योजना थी, लेकिन यह फाइलों तक ही सिमट कर रह गया. यहां भी कूड़ा कचरा का ढेर लगा रहता है. कुछ साल पूर्व थाना चौक के समीप विद्यापति स्मारक पार्क बनाया गया, लेकिन इसमें कोई नहीं आता. यह सिर्फ स्मारक बनकर रह गया है. लोग इसमें घूमने, टहलने या बैठने नहीं आते हैं. विद्यापति पर्व समारोह के समय ही यहां चहल पहल होती है.
सार्वजनिक स्थानों पर पार्क बनाने की हो सकती है पहल
शहर में वाटसन स्कूल का मैदान इतना बड़ा है कि यहां किसी भाग में पार्क बनाकर मनोरंजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है. सूड़ी स्कूल के मैदान में भी पार्क बनाया जा सकता है.
शहर के लहेरियागंज, भौआड़ा, गदियानी रोड सहित कई अन्य जगहों पर भी पार्क निर्माण की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थलों का उपयोग राजनीतिक भाषणों के लिए कुछ ज्यादा ही हो रहा है. खासकर चुनाव करीब आते ही ऐसे सार्वजनिक स्थलों का उपयोग नेता भाषण के लिए अधिक करते हैं. उन्हें पार्क से अधिक वोट की चिंता रहती है.
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