नगर परिषद की विशेष टीम स्पॉट पर जाकर करेगी निर्माण की जांच
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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शहर में अब भूकंप रोधी मकान का ही निर्माण हो सकेगा. इसके लिए नगर परिषद (नप) प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है. जिले को भूकंप के हाइ सेंसेटिव जोन पांच में रहने के कारण नप प्रशासन अब केवल भूकंप रोधी मकान का नक्शा ही पास करेगा. सुरक्षा की नजरिये से नप प्रशासन की यह […]
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शहर में अब भूकंप रोधी मकान का ही निर्माण हो सकेगा. इसके लिए नगर परिषद (नप) प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है. जिले को भूकंप के हाइ सेंसेटिव जोन पांच में रहने के कारण नप प्रशासन अब केवल भूकंप रोधी मकान का नक्शा ही पास करेगा. सुरक्षा की नजरिये से नप प्रशासन की यह पहल काफी सकारात्मक मानी जा रही है.
मधुबनी : नगर परिषद प्रशासन ने विगत दिनों आये भूकंप को गंभीरता से लिया है. जान-माल की क्षति कम हो एवं लोगों के जीवन भर की कमाई से बनाया गया आशियाना सुरक्षित हो इसको लेकर नप प्रशासन अब सजग हो गया है.
नप ने अब बिना भूकंपरोधी मकान का नक्शा पास नहीं करने का निर्णय लिया है. शहर में मकान निर्माण के लिए अब केवल भूकंप रोधी मकान का नक्शा ही पास होगा. नप की माने तो भूकंप रोधी नक्शा पास कराने के लिए विचार किया जा रहा है.
नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देश में भूकंप रोधी भवन के विषय में कहा गया है. नगर परिषद ने इसकी कवायद शुरू कर दी है. नक्शा पास कराते समय भूकंप रोधी निर्माण की मानक को पूरी तरह ध्यान में रखा जायेगा. नप की ओर से वास्तुविद व अभियंता, नक्शा पास कराने के बाद स्पॉट पर जाकर इसका निरीक्षण करेंगे. जो यह तय करेंगे कि भवन का निर्माण मानक के अनुसार हो रहा है या नहीं.
दरअसल, बिहार एवं नेपाल में 25 अप्रैल से लगातार भूकंप के झटके से शहर के कई मकानों में दरार आ गयी है. गौरतलब हो कि मधुबनी भूकंप के हाइ सेंसेटिव जोन पांच में पड़ता है. यहां भूकंप आने पर हमेशा जानमाल के खतरे की संभावना बनी रहती है.
भूकंप जोन पांच में है मधुबनी
नए बिल्डिंग बाइलॉज में बिहार को तीन भागों में बांटा गया है. इसमें भूकंप के दौरान सर्वाधिक क्षति करने वाला, अधिक क्षति करने वाला एवं मध्यम क्षति करने वाला तीन श्रेणी में बांटा गया है. इसके कारण इसे तीन श्रेणी में बांटा गया है. इसमें मधुबनी जिला भूकंप के हाई सेंसेटिव जोन पांच के तहत आता है. वर्तमान में शहर में करीब 13 हजार मकान हैं. इसमें से भूकंप रोधी मकानों की संख्या काफी कम है. इसके कारण भूकंप के दौरान अधिक क्षति की संभावना रहती है.
क्षति का सर्वेक्षण कर रहा विभाग
नेपाल-बिहार में आये भूकंप के बाद अब शहर का नगर परिषद प्रशासन हरकत में आ गयी है. 25 अप्रैल को भूकंप का झटका इतना तीव्र था कि उसने शहर के लोगों को सकते में डाल दिया है. भूकंप के बाद शहर के कई इमारतों में दरारें आ गयी थीं. यही कारण है कि नप प्रशासन की ओर से मकान में आयी दरारों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है.
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा ने बताया कि नक्शा पास कराते समय भूकंप रोधी निर्माणों पर नये मानक को ध्यान में रखा जायेगा.
नगर परिषद की ओर से वास्तुविद व अभियंता की टीम स्पॉट पर जाकर भवन निर्माण की जांच करेगी और यह तय करेगी कि भवन का निर्माण नक्शा के अनुसार भूकंप रोधी हो रहा है या नहीं. खासकर एक तल्ला के ऊपर बन रहे भवनों पर खास ध्यान रखा जायेगा.
शहर में अवैध निर्माण के कारण नियमों की अवहेलना होती है. अधिकारी बताते हैं कि ऐसा नहीं कि केवल भवन निर्माण में भी नियमों को ध्यान देने की जरूरत होती है. भवनों की संरचना के आधार पर भी सड़क की चौड़ाई निर्भर होनी चाहिए.
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