ज्ञानचंद मौत मामले में 10 पर प्राथमिकी

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आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस कार्रवाई में तेजी मधुबनी : खजौली थाना के सुक्की साइफन के समीप रविवार को ग्रामीणों की पिटाई से ज्ञानचंद पासवान की मौत के मामले पर पुलिस की कार्रवाई में तेजी आयी है. पुलिस ने इस मामले में घायलों के बयान पर दस ग्रामीणों के खिलाफ नामजद व सात अज्ञात […]

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आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस कार्रवाई में तेजी
मधुबनी : खजौली थाना के सुक्की साइफन के समीप रविवार को ग्रामीणों की पिटाई से ज्ञानचंद पासवान की मौत के मामले पर पुलिस की कार्रवाई में तेजी आयी है. पुलिस ने इस मामले में घायलों के बयान पर दस ग्रामीणों के खिलाफ नामजद व सात अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
अरोपितों में कसमा, लश्करिया एवं भगवानपुर गांव के लोग शामिल हैं. इन लोगों पर तीन लोगों को पीटकर अधमरा कर देने का आरोप लगाया गया है.
बताया जाता है कि इसी पिटाई से जयनगर थाना के हनुमाननगर गांव के ज्ञानचंद की सोमवार की अहले सुबह मौत हो गयी थी. खजाैली थानाध्यक्ष ब्रज किशोर सिंह ने बताया कि अभियुक्तों को पकड़ने के लिए छापेमारी भी की गई है. घटना में शामिल नामजद आरोपित अपने घरों से भागे हुए हैं. पुलिस कर्मी ने घटनास्थल से जिन तीन लोगों घायल अवस्था में अस्पताल में भरती कराया था उसे पुलिस ने निदरेष बताया जाता है.
इन पर किसी भी प्रकार के कोई मामला किसी थाना में दर्ज नहीं है. वे तीनों तो जयनगर थाना के भगवानपुर गांव से अपने भाई बिट्ट पासवान व श्रवण पासवान द्वारा किये गये मोबाइल पर बचाव के लिये बुलाये जाने के कारण ही देखने आये थे. इसी दौरान कसमा गांव के ग्रामीणों ने उन्हें लुटेरा समझकर बुरी तरह से पीट दिया.
मौत से पहले दो बार अस्पताल लाया गया था ज्ञानचंद को
बताया जाता है कि सुक्की साइफन से पिटाई के बाद पुलिस अभिरक्षा में लिये गये मृतक ज्ञानचंद समेत तीन लोगों को इलाज के लिये पूरी रात खजाैली अस्पताल व थाना का चक्कर काटते रहे.
घायल जीवन व लालू पासवान ने सदर अस्पताल के सजिर्कल वार्ड में इलाज के क्रम में बताया है कि रात करीब 10 बजे रात में ग्रामीणों की पिटाई से बचायी थी. उसके बाद सीधे पीएचसी अस्पताल इलाज के लिये ले गयी. घायलों में ज्ञानचंद की हालत ज्यादा खराब दिख रही थी.
पहली बार करीब 10.30 बजे अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने सूई दी और ज्ञानचंद को पानी चढाया. इसके बाद 12.30 बजे रात में अस्पताल से छुट्टी मिली और थाना लाया गया. जहां तीनों को एक ही हाजत में रखा गया. इसके बाद फिर करीब 1.30 बजे रात में ज्ञानचंद की हालत बिगड़ने लगी तो पुलिस पुन: उसे लेकर अस्पताल आयी.
फिर उसे पानी चढाया गया और दर्द की सूई दी गयी थी. अस्पताल में करीब डेढ घंटे तक इलाज चला और करीब 3.30 बजे अस्पताल से थाना लाया गया. पुन: 5.30 बजे फिर तबीयत बिगड़ने लगी तो पुलिस ने उसे लेकर अस्पताल जाने लगी. पर इसी क्रम में उसकी मौत हो गयी थी.
पुलिस ने बचायी जान
सदर अस्पताल के सजिर्कल वार्ड में भरती लालू पासवान व जीवन पासवान ने बताया कि पुलिस ने ही उन लोगों की जान बचायी.
वरना वे लोग भी भीड़ की पिटाई से मर जाते. लालू ने बताया कि जब भीड़ में शामिल लोग उन लोगों की पिटाई कर रही थी उसी समय पुलिस वहां पहुंच गयी नहीं तो वे लोग उन्हें भी जान से मार डालते. लालू पासवान जयनगर में 12 वीं का छात्र है वहीं जीवन पासवान दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है. गत माह 10 अप्रैल को ही वह गांव आया था.
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