अक्सर खराब हो जाती है मशीन

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मधुबनीः सरकारी दफ्तरों में 11 बजे लेट नहीं 3 बजे भेंट नहीं की कार्यशैली एवं कर्मियों व पदाधिकारियों की गैरहाजिरी को नियंत्रण करने के लिये बायोमीटरिक सिस्टम से उपस्थिति दर्ज करने के लिये लागू किये जाने वाले सिस्टम का प्रयोग भी कोई बेहतर नहीं साबित हो सका है. अधिकारियों को अपना एटेंडेंस दर्ज करना नागवार […]

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मधुबनीः सरकारी दफ्तरों में 11 बजे लेट नहीं 3 बजे भेंट नहीं की कार्यशैली एवं कर्मियों व पदाधिकारियों की गैरहाजिरी को नियंत्रण करने के लिये बायोमीटरिक सिस्टम से उपस्थिति दर्ज करने के लिये लागू किये जाने वाले सिस्टम का प्रयोग भी कोई बेहतर नहीं साबित हो सका है. अधिकारियों को अपना एटेंडेंस दर्ज करना नागवार गुजरता रहा है. वहीं कर्मियों को भी यह सिस्टम रास नहीं आ रहा है क्योंकि इसमें बहानेबाजी नहीं चलने वाली है.

इसलिए समाहरणालय व सदर अस्पताल सहित अन्य स्थानों पर लगे इस सिस्टम को खराब करने की जुगाड़ हमेशा लगायी जाती रही है. थक हार कर समाहरणालय में इस सिस्टम को वरीय उप समाहर्ता के चैंबर में इसे लगा दिया गया. लेकिन यह भी 12 अक्तूबर को उपद्रवियों की भेंट चढ़ गयी. इस तरह यह सिस्टम अभी ठप पड़ा हुआ है. विभागीय सूत्रों की मानें तो पूर्व डीएम आदेश तितरमारे ने इसे गंभीरता से लिया था. बायोमीटरिक सिस्टम को इसके बाद से गंभीरता से नहीं लिया गया. मुख्यालय में सदर अस्पताल में भी लगाये गये इस सिस्टम का यही हाल है.

मशीन खराब कर दी जाती है या फिर मशीन की मॉनीटरिंग की जिम्मेवारी संभालने वाली एजेंसी बेपरवाह बन गयी है. यह तो जांच का विषय है. फिलवक्त स्थिति खराब है. प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में यह महज शो पीस बन कर रह गया है. वहीं पीएचसी में भी इस पर उपस्थिति दर्ज कराने में कर्मी व चिकित्सक अपनी मानहानी समझ रहे हैं. विभागीय कार्रवाई का आलम यह है कि अधिकारी खुद इस सिस्टम को एडॉप्ट नहीं करना चाहते हैं.

अधिकतम 40 फीसदी बनी हाजिरी
बायोमीटरिक सिस्टम की मॉनीटरिंग कर रही एजेंसी की सूत्रों की मानें तो अब तक 40 फीसदी हाजिरी बनायी जा सकी है. जब यह सिस्टम ठीक हालत में रहता भी है तो स्वास्थ्य विभाग में कर्मी व अधिकारी अपनी उपस्थिति इस पर दर्ज नहीं करते हैं. यह हाल कमोवेश सभी दफ्तरों की है.

जौली प्रतिनिधि के अनुसार, प्रखंड, अंचल एवं पीएचसी में यह सिस्टम ठप पड़ा हुआ है. प्रखंड व अंचल में तो उपद्रवियों के कारण मशीन जल चुका है. बीडीओ नित्यानंद पांडेय ने बताया कि इसे लेकर विभाग को लिखा गया है.

कहां-कहां लगी है मशीन
समाहरणालय, विकास भवन, सदर अस्पताल, सभी पीएचसी, प्रखंड एवं अंचल कार्यालय में बायोमीटरिक मशीन लगायी गयी है.

सिस्टम को कर्मियों ने नहीं स्वीकारा
जयनगर प्रतिनिधि के अनुसार, बायोमीटरिक यंत्र धरातल पर उतनी सफल नहीं है जितना विभागीय पदाधिकारियों ने दावा किया था. कई विभागों में बायोमीटरिक यंत्र नहीं है. जहां है वहां भी यंत्र की लुंज पुंज व्यवस्था है. वहीं चार पांच माह से बायोमीटरिक यंत्र खराब पड़ा हुआ है. बासोपट्टी अंचल कार्यालय, प्रखंड कार्यालय एवं प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र में यंत्र नहीं है. विभागीय पदाधिकारी एवं कर्मी सामान्य पंजी रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं. विगत कुछ माह पूर्व मधुबनी में हुई गोली कांड को लेकर बासोपट्टी में हुई आगजनी की घटना में विभिन्न प्रकार के फाइलों मशीनों के साथ बायोमीटरिक मशीन भी जल कर राख हो गया. घटना के बाद कार्यालय में नयी बायोमीटरिक यंत्र नहीं लगाया गया. यंत्र के अभाव में कर्मी सामान्य पंजी रजिस्टर में ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. जयनगर प्रखंड में भी इसका हॉल खराब ही माना जायेगा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कई बार बायोमीटरिक यंत्र खराब हुआ. वर्तमान में ये यंत्र कंडिशन में है. लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सभी कर्मी इस यंत्र से अपना उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं.

अस्पताल प्रबंधक प्रभात कुमार ने बताया कि कहने के बावजूद कर्मी अपना उपस्थिति बायोमीटरिक यंत्र से न करके पंजी रजिस्टर में ही दर्ज करते हैं. वहीं हाल प्रखंड कार्यालय एवं अंचल कार्यालय की है. नियम को ताक पर रख कर कर्मी अपना उपस्थिति बायोमीटरिक यंत्र न दर्ज करके पंजी रजिस्टर में दर्ज करते हैं. एसडीओ गुलाम मुस्तफा अंसारी ने बताया कि अनुमंडल कार्यालय में कार्यरत कर्मी अपना उपस्थिति बायोमीटरिक यंत्र में ही दर्ज करते हैं. लदनियां प्रखंड में भी बायोमीटरिक यंत्र का स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विगत पांच माह से बायोमीटरिक यंत्र खराब पड़ा है. अस्पताल के पदाधिकारी एवं कमी सामान्य पंजी रजिस्टर में ही अपना उपस्थिति दर्ज करते हैं. अस्पताल प्रबंधक के द्वारा अभी तक इसकी सूचना विभागीय पदाधिकारी को नहीं दी गयी है. प्रखंड कार्यालय एवं अंचल कार्यालय का भी हाल बेहाल है. बायोमीटरिक यंत्र खराब रहता है. पदाधिकारी एवं कर्मी पंजी रजिस्टर में ही अपना उपस्थिति दर्ज करवाना उचित समझते हैं. चूंकि बायोमीटरिक यंत्र एक छोटा सा यंत्र है जो इंटरनेट से जुड़ा हुआ है. जिसका सीधा कनेक्शन संबंधित जिला कार्यालय से होता है. जो पदाधिकारी एवं कर्मी अपना उपस्थिति बायोमीटरिक यंत्र के द्वारा दर्ज करवाते हैं जिला कार्यालय का पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है. लेकिन सरकार की लुंज पुंज व्यवस्था के कारण अक्सर विभागीय पदाधिकारी एवं अन्य कर्मी कार्यालय लेट से आते हैं. इसलिए अपनी साक्ष्य को छिपाने के लिये पदाधिकारी बायोमीटरिक यंत्र का उपयोग नहीं करते हैं.

तकनीकी गड़बड़ी से बढ़ी समस्या
बेनीपट्टी प्रतिनिधि के अनुसार, चार प्रखंडों वाले अनुमंडल के कई कार्यालयों में मशीनें महज शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. अनुमंडल के बेनीपट्टी एवं हरलाखी प्रखंड सह अंचल कार्यालय में उक्त मशीनें कार्य कर रही है और अधिकारी व कर्मचारी इसी से अपनी अपनी हाजिरी बनाते हैं जबकि बिस्फी एवं मधवापुर के प्रखंड सह अंचल कार्यालय में मशीनें तो लगी पर आज तक बायोमीटरिक मशीन पर अधिकारी और कर्मचारी अपनी हाजिरी बना नहीं सके हैं. बिस्फी के बीडीओ नौशाद अहमद खां एवं सीओ रीतेश कुमार वर्मा ने बताया कि यहां उक्त मशीनें तो लगी लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण मशीन कभी चालू नहीं हुआ और इससे हाजिरी बनाने का सपना अभी तक मयस्सर नहीं हो सका है.

मधवापुर के सीओ अशोक कुमार ने बताया कि यहां उक्त मशीन की सुविधा ही नहीं दी गई है. वहीं आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उक्त मशीन की सुविधा मधवापुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय को भी मिली थी पर मशीन में खराबी के कारण यह सुविधा वहां लागू नहीं होगा. बेनीपट्टी के बीडीओ मंडन मिश्र व सीओ अजय कुमार गुप्ता तथा हरलाखी के बीडीओ रामचंद्र राम व सीओ सुधीर कुमार ने बताया कि यहां बायोमीटरिक मशीनें कार्य कर रही है और सारे अधिकारी व कर्मचारी इसके द्वारा ही हाजिरी बनाते हैं. इधर एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि अनुमंडल के चारों प्रखंड सह अंचल कार्यालय को मशीन का प्रयोग हाजिरी में करने का निर्देश दिया गया है. एसडीओ श्री कुमार ने बताया कि बिस्फी और मधवापुर के प्रखंड सह अंचल कार्यालय उक्त मशीन को ठीक कराकर इसका प्रयोग शुरू करें अन्यथा कार्रवाई की जायेगी.

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